चिकन और अंडे को अक्सर प्रोटीन का सबसे आसान जरिया माना जाता है। लेकिन शाकाहारी लोगों को प्रोटीन की कमी की चिंता करने की जरूरत नहीं है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट यानी पेट और आंत के विशेषज्ञ इसकी वजह बताते हैं। उनके मुताबिक, कुछ शाकाहारी फूड्स प्रोटीन से भरपूर होते हैं। साथ ही ये फूड्स गट हेल्थ यानी आंत के स्वास्थ्य को भी सुधारते हैं।
Vegetarian Protein Gut Health: बिना अंडे-चिकन प्रोटीन कैसे मिलेगा
दही, दाल-चना, टोफू, टेम्पेह और एडामेम जैसे शाकाहारी फूड्स प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। इनमें कई फूड्स में प्रोबायोटिक्स और फाइबर भी मौजूद होता है। ये पोषक तत्व आंत में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं। इस तरह ये पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं। यही vegetarian protein gut health का मुख्य फायदा है।
टॉप 5 शाकाहारी प्रोटीन फूड्स की सूची
- दही (खासकर गाढ़ी/ग्रीक स्टाइल दही)
- दाल, चना और राजमा जैसी फलियां
- टोफू
- टेम्पेह (फर्मेंटेड सोयाबीन)
- एडामेम (हरा सोयाबीन)
दही: प्रोटीन के साथ प्रोबायोटिक्स का फायदा
दही में प्रोटीन के अलावा कैल्शियम और विटामिन बी-12 जैसे पोषक तत्व होते हैं। कई दही में लाइव कल्चर यानी जीवित प्रोबायोटिक बैक्टीरिया भी होते हैं। ये बैक्टीरिया आंत में अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखते हैं। Mayo Clinic के अनुसार, ये फायदेमंद बैक्टीरिया पाचन में मदद करते हैं। साथ ही ये शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में भी भूमिका निभाते हैं।
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर अदिति छाडा के मुताबिक, दही में बायोएक्टिव पेप्टाइड्स मौजूद होते हैं। ये पेप्टाइड्स प्रोटीन के पाचन से बनने वाले टुकड़े होते हैं। इनमें सूजन-रोधी गुण होते हैं और ये आंत की लाइनिंग को मजबूत बनाते हैं। इस तरह हानिकारक बैक्टीरिया और टॉक्सिन शरीर में आसानी से नहीं पहुंच पाते।
कुछ लोगों को दूध से बनी चीजें पचाने में दिक्कत होती है। उनके लिए फोर्टिफाइड सोया दही एक विकल्प हो सकता है। इसमें कैल्शियम और विटामिन डी अतिरिक्त रूप से मिलाया जाता है।
दाल और फलियां: प्रोटीन के साथ फाइबर का डबल फायदा
दाल, चना, राजमा और मूंग शाकाहारी प्रोटीन के भरोसेमंद स्रोत माने जाते हैं। इनमें प्रोटीन के साथ-साथ फाइबर भी भरपूर मात्रा में होता है। यह फाइबर आंत में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है।
Mayo Clinic Press के मुताबिक, आंत के बैक्टीरिया बिना पचे फाइबर को तोड़ते हैं। इस प्रक्रिया से शॉर्ट-चेन फैटी एसिड बनते हैं। ये एसिड कोलन यानी बड़ी आंत की कोशिकाओं को सही तरीके से काम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा फाइबर कब्ज की समस्या को कम कर सकता है। यह इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) के लक्षणों को घटाने में भी उपयोगी माना जाता है।
कच्ची या अधपकी फलियां कुछ लोगों में गैस या भारीपन बना सकती हैं। इसलिए दाल-चना को अच्छी तरह भिगोकर पकाना बेहतर होता है। पूरी तरह पका हुआ भोजन पाचन को आसान बनाता है।
टोफू और टेम्पेह: सोयाबीन से बने कम्प्लीट प्रोटीन
टोफू सोयाबीन से बनता है और इसे कम्प्लीट प्रोटीन माना जाता है। इसका मतलब है कि इसमें शरीर के लिए जरूरी सभी अमीनो एसिड मौजूद होते हैं। हल्के तरीके से पकाया गया टोफू पचाने में आसान होता है। स्टीम करना या भाप में पकाना इसके लिए अच्छे तरीके हैं।
टेम्पेह भी सोयाबीन से बनता है, लेकिन इसे फर्मेंट यानी किण्वित किया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 100 ग्राम टेम्पेह में लगभग 20 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है। फर्मेंटेशन की वजह से इसमें प्रोबायोटिक्स भी मौजूद होते हैं। साथ ही इसमें प्रीबायोटिक्स भी होते हैं, जो आंत के बैक्टीरिया को पोषण देते हैं। एक खास बात यह भी है कि टेम्पेह में विटामिन बी-12 भी पाया जाता है। यह पोषक तत्व आमतौर पर सिर्फ नॉन-वेज फूड्स में मिलता है, इसलिए शाकाहारी लोगों के लिए यह उपयोगी है.
एडामेम: फाइबर और प्रोटीन का हल्का स्नैक विकल्प
एडामेम यानी हरा सोयाबीन एक हल्का लेकिन पौष्टिक स्नैक है। इसमें प्रोटीन और फाइबर दोनों भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं. Zoe के मेडिकल डायरेक्टर और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर विल बुल्सिविच इसकी सलाह देते हैं। उनके मुताबिक, गट हेल्थ के लिए प्रोटीन और फाइबर वाले स्नैक्स चुनना फायदेमंद है। यह कॉम्बिनेशन भूख को नियंत्रित रखने में मदद करता है। साथ ही यह पाचन को दुरुस्त रखने में भी सहायक होता है.
हल्का उबालकर या भाप में पकाकर एडामेम को शाम के स्नैक की तरह खाया जा सकता है. यह तला-भुना खाने का हेल्दी विकल्प बन सकता है।
डाइट में शामिल करने का आसान तरीका
- नाश्ते में दही के साथ फल या मूसली लें
- लंच में दाल-चावल या दाल-रोटी को नियमित हिस्सा बनाएं
- सब्जी या सलाद में टोफू क्यूब्स मिलाएं
- शाम के स्नैक में एडामेम या भुना चना चुनें
- टेम्पेह को सैंडविच, स्टिर-फ्राई या सलाद में इस्तेमाल करें
एक ही तरह का प्रोटीन बार-बार खाने के बजाय अलग-अलग सोर्स को बदल-बदलकर लेना बेहतर माना जाता है। इस तरह शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिल सकते हैं |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सिर्फ दाल-चावल से पूरा प्रोटीन मिल सकता है? दाल और चावल को साथ खाने से अमीनो एसिड प्रोफाइल बेहतर होता है, लेकिन विशेषज्ञ फिर भी दही, टोफू या टेम्पेह जैसे अन्य सोर्स शामिल करने की सलाह देते हैं ताकि प्रोटीन के साथ प्रोबायोटिक्स जैसे अतिरिक्त फायदे भी मिलें.
क्या ज्यादा फलियां खाने से गैस की समस्या हो सकती है? हां, अधपकी या ज्यादा मात्रा में फलियां खाने से कुछ लोगों को गैस या भारीपन महसूस हो सकता है। इसलिए मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाना और अच्छी तरह पकाना बेहतर तरीका है।
डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।