भागीरथी बिष्ट

चमोली के सीमांत वाण गांव से निकली भागीरथी बिष्ट ने खेल जगत में उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। उन्होंने हैदराबाद मैराथन में शानदार प्रदर्शन किया। 42.195 किलोमीटर की फुल मैराथन उन्होंने करीब 2 घंटे 51 मिनट में पूरी की। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने भारतीय महिला वर्ग में दूसरा स्थान हासिल किया।

पहाड़ी क्षेत्र से आने वाली इस धाविका की सफलता इसलिए खास है। उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच अपनी पहचान बनाई है। वहीं, उनकी लगातार मेहनत ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में मजबूत दावेदार बनाया है।

हैदराबाद में शानदार प्रदर्शन से जीता रजत

हैदराबाद मैराथन में भागीरथी बिष्ट ने 2 घंटे 51 मिनट 41 सेकंड का समय दर्ज किया। भारतीय महिला वर्ग में उनसे आगे निर्माबेन ठाकोर रहीं। उन्होंने 2 घंटे 50 मिनट 20 सेकंड में दौड़ पूरी की। ओवरऑल महिला वर्ग में भागीरथी सातवें स्थान पर रहीं।

इस प्रदर्शन के बाद उन्हें रजत पदक से सम्मानित किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने उन्हें पदक प्रदान किया।

पहाड़ की पगडंडियों से शुरू हुआ सफर

भागीरथी बिष्ट चमोली जिले के देवाल क्षेत्र के वाण गांव की रहने वाली हैं। उनका दौड़ का सफर पहाड़ी रास्तों से शुरू हुआ। इसके बाद नियमित अभ्यास ने उन्हें बड़ी प्रतियोगिताओं तक पहुंचाया।

ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी भागीरथी ने अपनी मेहनत से अलग पहचान बनाई। उनकी उपलब्धि क्षेत्र की उन बेटियों के लिए प्रेरणा है। खासकर उनके लिए, जो सीमित सुविधाओं के बावजूद खेलों में करियर बनाना चाहती हैं।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान

भागीरथी इससे पहले भी लंबी दूरी की दौड़ में अच्छा प्रदर्शन कर चुकी हैं। वह ईरान में आयोजित 42 किलोमीटर की मैराथन में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा, देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने हिस्सा लिया है।

विश्व एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में उनका मैराथन व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 2 घंटे 48 मिनट 59 सेकंड दर्ज है। इसके अलावा, 2026 में उनके नाम 10,000 मीटर और 10 किलोमीटर रोड रेस के प्रदर्शन भी दर्ज हैं।

कोच सुनील शर्मा के मार्गदर्शन में तैयारी

भागीरथी बिष्ट के कोच सुनील शर्मा हिमाचल प्रदेश के सिरमौर से हैं। वह खुद अंतरराष्ट्रीय मैराथन एथलीट रह चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में भागीरथी नियमित और कठिन प्रशिक्षण कर रही हैं।

कोच के अनुसार, भागीरथी में प्रतिभा के साथ मेहनत करने की क्षमता भी है। इसलिए उनका लक्ष्य केवल घरेलू प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है। वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं।

अब ओलंपिक गोल्ड पर नजर

हैदराबाद का रजत पदक भागीरथी बिष्ट के सफर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनका अगला बड़ा लक्ष्य ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। वह मैराथन में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने का सपना देखती हैं।

उनकी कहानी बताती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर अभ्यास से मुश्किल परिस्थितियों को पीछे छोड़ा जा सकता है। वाण गांव से शुरू हुई उनकी दौड़ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की उम्मीदों तक पहुंच चुकी है।

उपलब्धि के अहम पड़ाव

  • हैदराबाद मैराथन में 42.195 किलोमीटर की दौड़ पूरी की।
  • 2 घंटे 51 मिनट 41 सेकंड का समय दर्ज किया।
  • भारतीय महिला वर्ग में रजत पदक हासिल किया।
  • ईरान की 42 किलोमीटर मैराथन में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
  • मैराथन में उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 2:48:59 है।

आगे बड़े मंच पर बढ़ने की तैयारी

भागीरथी बिष्ट की उपलब्धि उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। उनकी मेहनत ने पहाड़ की प्रतिभाओं को नई उम्मीद दी है। अब उनकी नजर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर है।


यह भी पढ़ें – मानसी पारेख नेपाल बाढ़ से सुरक्षित लौटीं

अरशद वारसी नेपोटिज्म पर बोले, स्टारकिड्स पर राय