आई फ्लू से बचाव के लिए आंखों की सफाई करती महिला

सितंबर की शुरुआत के साथ ही उमस और नमी भरे मौसम में आई फ्लू यानी कंजक्टिवाइटिस के मामले बढ़ने लगते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई से सितंबर के बीच आंखों में संक्रमण के मामलों में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जाती है. भीड़भाड़ वाली जगहों, दफ्तरों और स्कूलों में यह संक्रमण तेजी से फैलता है, इसलिए समय रहते सावधानी बरतना जरूरी है.

आंखों में जलन या लालिमा हो तो क्या समझें

अगर आंखों में लालिमा, खुजली, पानी आना या चिपचिपापन महसूस हो तो यह आई फ्लू के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं. यह संक्रमण वायरस या बैक्टीरिया से फैलता है और आमतौर पर एक से दूसरे व्यक्ति में तौलिया, तकिया या हाथ मिलाने से पहुंचता है. सही देखभाल से यह सात से दस दिन में ठीक हो जाता है.

नमी और भीड़भाड़ में संक्रमण क्यों तेजी से फैलता है

  • उमस भरे मौसम में वायरस दरवाजों के हैंडल, मोबाइल फोन और तौलिये जैसी सतहों पर ज्यादा देर तक जिंदा रहते हैं.
  • जलभराव वाले इलाकों में दूषित पानी से आंखों का सीधा संपर्क संक्रमण का खतरा बढ़ाता है.
  • स्कूल, दफ्तर और सार्वजनिक परिवहन जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों में यह संक्रमण तेजी से एक से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है.
  • संक्रमित व्यक्ति के इस्तेमाल किए गए तौलिये, रूमाल, चश्मे या आई मेकअप से भी यह फैल सकता है.

आई फ्लू से बचाव के लिए रोजमर्रा में अपनाएं ये आदतें

साफ-सफाई की आदतें

हाथों को बार-बार साबुन से धोएं, खासकर आंखों को छूने से पहले. आंखों को साफ और सूखा रखें, और गंदे हाथों से आंखें मलने से बचें. बारिश के पानी के सीधे संपर्क में आंखें आने से बचाएं, क्योंकि इसमें प्रदूषक तत्व हो सकते हैं.

निजी सामान साझा न करें

तौलिया, रूमाल, चश्मा, आई मेकअप या कॉन्टैक्ट लेंस किसी के साथ साझा न करें, यहां तक कि परिवार के सदस्यों के साथ भी नहीं. यह संक्रमण फैलने का सबसे आम जरिया माना जाता है. नम और सीलन भरी जगहों को नियमित रूप से साफ रखें ताकि वहां रुका हुआ पानी बैक्टीरिया का घर न बने.

संक्रमण होने पर बरतें ये सावधानियां

अगर आंखों में लक्षण दिखें तो तुरंत आंखों को छूने से बचें और अलग तौलिया इस्तेमाल करें. ठंडी और साफ पानी की पट्टी से आराम मिल सकता है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी आई ड्रॉप इस्तेमाल न करें. लक्षण गंभीर हों या कुछ दिनों में सुधार न हो तो नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना बेहतर रहेगा.

स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए खास ध्यान

बच्चों में यह संक्रमण तेजी से फैलता है क्योंकि वे अक्सर आंखें मलते हैं और सामान साझा करते हैं. संक्रमण के दौरान बच्चों को स्कूल न भेजना ही बेहतर होता है, ताकि दूसरे बच्चों तक यह न पहुंचे. बच्चों को हाथ धोने की आदत सिखाना इस मौसम में सबसे असरदार बचाव माना जाता है. स्कूल और कोचिंग सेंटर में भी इस मौसम में क्लासरूम की सफाई और हाथ धोने की सुविधा पर विशेष ध्यान देना चाहिए.

दफ्तर और सार्वजनिक जगहों पर काम करने वालों के लिए सुझाव

भीड़भाड़ वाली जगहों में सावधानी

दफ्तर, बस या ट्रेन जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों में सतहों को छूने के बाद आंखों को छूने से पहले हाथ जरूर धोएं. सार्वजनिक परिवहन में इस्तेमाल होने वाले हैंडल और सीटों पर वायरस लंबे समय तक टिक सकते हैं, इसलिए हैंड सैनिटाइजर साथ रखना फायदेमंद रहता है. जिन दफ्तरों में एक साथ कई लोग काम करते हैं, वहां संक्रमित सहकर्मी को कुछ दिन घर से काम करने की सलाह दी जा सकती है.

धूप का चश्मा और सुरक्षा के अन्य उपाय

बारिश या तेज हवा वाले दिनों में धूप का चश्मा पहनने से आंखों को धूल और पानी के सीधे संपर्क से बचाया जा सकता है. जिन लोगों को कॉन्टैक्ट लेंस पहनने की आदत है, उन्हें इस मौसम में लेंस की जगह चश्मे का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. लेंस का इस्तेमाल जारी रखना हो तो उसे साफ करने के नियमों का सख्ती से पालन करें.

आंखों की सेहत के लिए खानपान में शामिल करें ये चीजें

विटामिन-ए और सी से भरपूर फल-सब्जियां जैसे गाजर, पपीता और संतरा आंखों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं. पर्याप्त पानी पीना और नींद पूरी लेना भी शरीर की समग्र रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी माना जाता है. संक्रमण के दौरान तली-भुनी और बहुत मसालेदार चीजों से परहेज करना बेहतर रहता है, ताकि शरीर जल्दी ठीक होने पर ध्यान लगा सके.

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है और यह चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है. आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें, खासकर अगर लक्षण गंभीर हों या लंबे समय तक बने रहें.

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