रायपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव भक्तिभाव से मनाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस्कॉन रायपुर के आयोजन में पहुंचे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन किए। इसके बाद मुख्यमंत्री ने पूजा-अर्चना और शंख अभिषेक किया।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की। मुख्यमंत्री के अनुसार धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।
धार्मिक पर्यटन से मजबूत होगी छत्तीसगढ़ की पहचान
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की धार्मिक विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने प्रदेश को धर्म और अध्यात्म की भूमि बताया। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या के मायके के रूप में भी प्रसिद्ध है।
प्रदेश में कई प्राचीन मंदिर और आस्था केंद्र मौजूद हैं। इनमें भोरमदेव और विभिन्न शिवधाम प्रमुख हैं। वहीं मां बमलेश्वरी और मां महामाया जैसे शक्तिपीठ भी हैं।
सरकार इन स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक अनुभव उपलब्ध कराना है।
तीर्थ योजनाओं से श्रद्धालुओं को मिल रही सुविधा
राज्य सरकार आर्थिक कारणों से तीर्थ यात्रा से वंचित लोगों को सुविधा दे रही है। इसके लिए अलग-अलग योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से श्रद्धालुओं को अयोध्या ले जाया जा रहा है। अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत बुजुर्गों को अवसर मिल रहा है। इसके जरिए वरिष्ठ नागरिक प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कर सकते हैं।
आस्था के साथ रोजगार पर भी सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक स्थलों का विकास केवल आस्था तक सीमित नहीं है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
पर्यटन बढ़ने से स्थानीय बाजारों में गतिविधियां बढ़ेंगी। इससे छोटे दुकानदारों और सेवा क्षेत्र को लाभ मिल सकता है।
इसके अलावा स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार बन सकते हैं। कारीगरों और स्व-सहायता समूहों की आय भी बढ़ सकती है।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख आस्था केंद्रों पर जोर
सरकार प्रदेश के धार्मिक स्थलों को बेहतर स्वरूप देने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है।
- धार्मिक विरासत से विकास का नया रास्ता
- छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत काफी समृद्ध है। इसलिए इसके संरक्षण के साथ आधुनिक सुविधाओं का विस्तार जरूरी है।
- धार्मिक पर्यटन के विकास से विरासत संरक्षण को आर्थिक आधार मिल सकता है। इससे स्थानीय लोगों को अपनी पारंपरिक गतिविधियों से आय का अवसर मिलेगा।
- वहीं बेहतर सड़क, आवास और अन्य सुविधाएं यात्रियों को आकर्षित करेंगी। इससे प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को भी नई दिशा मिल सकती है।
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