प्राकृतिक वस्तुओं से होगा निर्माण, ग्रामीण कारीगरों को देंगे प्रशिक्षण

रायपुर। आजादी के 75वें वर्ष में आजादी की लड़ाई के मूल्यों, सिद्धांतों, आदर्शों तथा महात्मा गांधी की ग्राम-स्वराज की संकल्पना को अक्षुण्ण रखने के लिए नवा-रायपुर में भी वर्धा की तर्ज पर सेवा-ग्राम की स्थापना की जाएगी। छत्तीसगढ़ सरकार वर्धा स्थित महात्मा गांधी के आश्रम “सेवाग्राम’ जैसा ही एक आश्रम नवा रायपुर में बनवाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसके लिए 75 से 100 एकड़ जमीन चिह्नित करने का निर्देश दिया है। यह आश्रम, आजादी की लड़ाई के मूल्यों, सिद्धांतों, आदर्शों और महात्मा गांधी की ग्राम-स्वराज की संकल्पना को बचाए रखने के विचार के साथ स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को अधिकारियों से चर्चा की। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री ने सभी प्रकार के ग्रामीण कारीगरों के प्रशिक्षण की व्यवस्था करने को कहा है। ऐसा इसलिए, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं आत्मनिर्भर-ग्राम की कल्पना को साकार किया जा सके। मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा है कि 2 अक्टूबर से पहले इसकी कार्ययोजना पेश करें।
चूना-मिट्टी से होगा निर्माण

अधिकारियों ने बताया, नवा रायपुर में प्रस्तावित सेवाग्राम में अतिथि विषय-विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। साथ ही वहां वृद्धाश्रम और समाज के कमजोर तबकों के लिए स्कूल भी स्थापित किया जाना है। इसके उद्देश्यों में पर्यटन के अवसरों को बढ़ाना, लोक कलाओं को प्रोत्साहन और वैचारिक आदान-प्रदान के लिए छत्तीसगढ़ में एक विश्व स्तरीय व्यवस्था का निर्माण करना भी है। सेवाग्राम में प्रस्तावित ‘विजिटर्स सेंटर’ सीखने, निर्वाह करने और गांधी के सिद्धांतों का स्मरण करने का केंद्र होगा। इस आश्रम का निर्माण मिट्टी, चूना, पत्थर जैसी प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग करते हुए किया जाएगा।

लोक शिल्पों से परिचित होंगे पर्यटक

अधिकारियों ने बताया, छत्तीसगढ़ अपनी विशिष्ट कला और शिल्प के लिए जाना जाता है। छत्तीसगढ़ के बस्तर, रायगढ़ और अन्य जिलों में बेलमेटल, लोहा, टेराकोटा, पत्थर, कपड़े और बांस का उपयोग करके विभिन्न कलात्मक वस्तुओं का निर्माण होता है। सेवा-ग्राम में प्रस्तावित ‘विजिटर्स सेंटर’ सीखने, निर्वाह करने और गांधी के सिद्धांतों का स्मरण करने का केंद्र जगह होगा। सेवाग्राम एक ऐसा स्थान होगा जहां पर्यटक, स्थानीय कला और शिल्प, व्यंजनों के बारे में जान सकेंगे। अपनी जानकारियों और अनुभवों को साझा कर सकेंगे। यहां एक ओपन थियेटर भी होगा, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

1936 में बना था वर्धा का सेवाग्राम

छत्तीसगढ़ की इस परियोजना के पीछे महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित सेवाग्राम है, जिसकी स्थापना वर्ष 1936 में महात्मा गांधी और उनकी पत्नी कस्तूरबा के निवास के रूप की गई थी। वर्धा का यह आश्रम महात्मा गांधी के सपनों के अनुरूप ग्रामीण भारत के पुनर्निर्माण का केंद्र भी था। गांधीजी का मानना था कि भारत की स्थितियों में स्थायी रूप से सुधार के लिए ग्राम-सुधार ही एकमात्र विकल्प है।