वियतनाम में हुए मिस वर्ल्ड 2026 के वर्ल्ड डिजाइनर अवॉर्ड सेगमेंट में एक गाउन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। यह गाउन किसी आम पेजेंट पोशाक जैसा नहीं था, बल्कि मातृत्व और सी-सेक्शन के अनुभव को कपड़े की परतों में उतारने की कोशिश थी।
गाउन की पूरी कहानी एक नजर में
27 अगस्त 2026 को वियतनाम में मिस वर्ल्ड युगांडा मुहोज़ा त्रिविया एले ने डिजाइनर Keesha Abdallah का बनाया “लेयर्स ऑफ लाइफ” गाउन पहना. यह ऑम्ब्रे गाउन सी-सेक्शन के दौरान कटने वाली सात एनाटॉमिकल परतों से प्रेरित था. गाउन का मकसद मातृत्व और स्त्रीत्व को कला के जरिए सम्मान देना था, और यह अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है.
गाउन की सबसे जरूरी बातें
- गाउन का नाम “लेयर्स ऑफ लाइफ” है और इसे Keesha Abdallah ने डिजाइन किया.
- यह वर्ल्ड डिजाइनर अवॉर्ड, वियतनाम ब्यूटी फैशन फेस्ट के 17वें संस्करण में पहना गया.
- प्रेरणा सी-सेक्शन की सात एनाटॉमिकल परतों से मिली — त्वचा, फैट, फेशिया, रेक्टस मसल्स, पेरिटोनियम, यूटेरस मसल, एम्नियोटिक सैक.
- डिजाइनर ने इसे अपने खुद के मातृत्व अनुभव से जोड़कर बनाया.
- गाउन का मकसद नस्ल नहीं, बल्कि मातृत्व और जीवन के सार्वभौमिक अनुभव को दिखाना था.
Keesha Abdallah Gown: किसने और क्यों बनाया
मिस वर्ल्ड युगांडा मुहोज़ा त्रिविया एले ने 27 अगस्त 2026 को वियतनाम ब्यूटी फैशन फेस्ट के 17वें संस्करण “सोल ऑफ हेरिटेज” के तहत वर्ल्ड डिजाइनर अवॉर्ड में यह गाउन पहना। इसे डिजाइनर कीशा अब्दुल्ला ने तैयार किया और इसका नाम रखा गया “लेयर्स ऑफ लाइफ”. गाउन की प्रेरणा सी-सेक्शन के दौरान डॉक्टर जिन सात एनाटॉमिकल परतों से गुजरते हैं, वहां से मिली — त्वचा, फैट, फेशिया, रेक्टस मसल्स, पेरिटोनियम, यूटेरस मसल और एम्नियोटिक सैक.
गाउन में मरमेड सिल्हूट, फ्लोइंग ट्यूल और पीच-गोल्ड से गहरे लाल-बरगंडी तक जाने वाला ऑम्ब्रे कलर पैलेट शामिल था. हर रंग और हर परत को एक स्टेज, टेक्सचर या ट्रांजिशन को दिखाने के लिए चुना गया था.
सी-सेक्शन की सात परतों को डिजाइन में कैसे उतारा गया
अब्दुल्ला ने गाउन बनाने से पहले सी-सेक्शन के दौरान कटने वाली परतों की इलस्ट्रेशन और मेडिकल इमेजरी को बारीकी से स्टडी किया. इन परतों को उन्होंने सीधे कॉपी करने के बजाय फैब्रिक की टेक्सचर, कलर ग्रेडिएंट और लेयरिंग तकनीक में बदला. पीच और गोल्ड जैसे हल्के रंग गाउन की ऊपरी परतों में हैं, जबकि गहरे लाल और बरगंडी रंग नीचे की तरफ बढ़ते हैं — यह क्रम सर्जरी के दौरान परत-दर-परत आगे बढ़ने की प्रक्रिया जैसा है. इस तरह एक मेडिकल प्रोसेस, जिसे आमतौर पर सिर्फ क्लिनिकल नजरिए से देखा जाता है, हाई-फैशन गाउन के रूप में सामने आया.
पेजेंट फैशन में यह गाउन क्यों अलग है
मिस वर्ल्ड जैसे बड़े मंचों पर वर्ल्ड डिजाइनर अवॉर्ड सेगमेंट में आमतौर पर चमक-दमक और ड्रामैटिक सिल्हूट पर फोकस रहता है. लेकिन “लेयर्स ऑफ लाइफ” गाउन ने इस ट्रेंड से हटकर एक निजी और भावनात्मक विषय को स्टेज पर लाने का साहस दिखाया. फैशन क्रिटिक्स और सोशल मीडिया यूजर्स दोनों ने इसे सराहा, क्योंकि यह पहला मौका था जब किसी पेजेंट गाउन ने सीधे तौर पर सी-सेक्शन जैसे अनुभव को थीम बनाया.
डिजाइनर की निजी कहानी
अब्दुल्ला ने इंस्टाग्राम पर साझा किया कि यह कॉन्सेप्ट उनके अपने मातृत्व अनुभव से जुड़ा है. उन्होंने बताया कि गाउन बनाते समय नस्ल या त्वचा का रंग कभी सोच का हिस्सा नहीं था, बल्कि शुरुआती बिंदु सिर्फ एक स्त्री और उसके शरीर की वे परतें थीं जो हर महिला में समान रूप से मौजूद होती हैं.
अब्दुल्ला के मुताबिक हर रंग और परत किसी स्टेज, टेक्सचर या ट्रांजिशन को दिखाने के लिए चुनी गई थी, न कि किसी खास नस्ल को दर्शाने के लिए, और यही वजह है कि गाउन का नाम “लेयर्स ऑफ लाइफ” रखा गया.
सोशल मीडिया पर मिली प्रतिक्रिया
गाउन के वायरल होते ही इंस्टाग्राम पर तारीफों की झड़ी लग गई. कई यूजर्स ने इसे सी-सेक्शन के शारीरिक और भावनात्मक अनुभव को कला में बदलने वाला मास्टरपीस बताया. कुछ महिला यूजर्स ने खुद के दो सी-सेक्शन अनुभवों का जिक्र करते हुए गाउन को खासतौर पर सराहा.
अब्दुल्ला ने भी माना कि इस डिजाइन ने कई तरह की बातचीत को जन्म दिया है, और यही कला का असली मकसद है — लोगों को अलग-अलग तरीकों से सोचने और महसूस करने के लिए प्रेरित करना.
गाउन के पीछे का बड़ा संदेश
अब्दुल्ला के मुताबिक यह गाउन सिर्फ सी-सेक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि मातृत्व, स्त्रीत्व और जीवन के चमत्कार को दिखाने की कोशिश है — ऐसी चीजें जो अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को आपस में जोड़ती हैं. उनका कहना था कि जीवन किसी एक नस्ल, देश या रंग का नहीं होता, बल्कि यह सार्वभौमिक है.
छत्तीसगढ़ पाठकों के लिए क्यों मायने रखती है यह कहानी
फैशन की दुनिया में अक्सर ग्लैमर पर ज्यादा और मैसेज पर कम ध्यान दिया जाता है. यह गाउन दिखाता है कि कपड़े सिर्फ दिखावे का जरिया नहीं, बल्कि किसी अनुभव या भावना को बयां करने का माध्यम भी बन सकते हैं. भारत में भी हर साल लाखों महिलाएं सी-सेक्शन से गुजरती हैं, इसलिए यह कहानी सिर्फ पेजेंट फैशन तक सीमित न होकर मातृत्व के अनुभव से भी जुड़ती है.
रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे शहरों में भी फैशन और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को लेकर युवा पाठकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है. इस तरह की ग्लोबल स्टोरीज़ स्थानीय पाठकों को यह भी दिखाती हैं कि फैशन डिजाइन सिर्फ ट्रेंड फॉलो करने का जरिया नहीं, बल्कि सामाजिक बातचीत शुरू करने का एक जरिया भी बन सकता है — चाहे वह मातृत्व हो, शरीर की विविधता हो या महिलाओं के निजी अनुभव.
डिस्क्लेमर: यह लेख पेजेंट फैशन और डिजाइनर के बयानों पर आधारित एक फीचर स्टोरी है, न कि चिकित्सकीय सलाह. सी-सेक्शन से जुड़ी किसी भी मेडिकल जानकारी के लिए डॉक्टर या प्रमाणित स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें.
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