अलीशा चौधरी

एशियाई खेलों में अलीशा चौधरी भारत के लिए पदक की उम्मीद हैं। जून में उन्होंने एशियाई सीनियर कराटे चैंपियनशिप में ऐतिहासिक स्वर्ण जीता था। अब एशियाड में उन्हें कोच के बिना उतरना होगा। कराटे टीम के साथ कोच की जगह टीम लीडर भेजा जा रहा है।

कोच की जगह टीम लीडर भेजने का फैसला

भारत की ओर से अलीशा 55 किलोग्राम वर्ग में उतरेंगी। वहीं चेतन भट्ट 84 किलोग्राम वर्ग में चुनौती पेश करेंगे। दोनों खिलाड़ियों के साथ कोच के बजाय आदिकेशवा पेरुमल को टीम लीडर बनाया गया है। टीम लीडर को मैट के पास बतौर कोच बैठने की अनुमति नहीं होगी।

कराटे में कोच की भूमिका केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहती। मुकाबले के दौरान तकनीकी सलाह भी महत्वपूर्ण होती है। किसी फैसले पर आपत्ति होने पर कोच रिव्यू की प्रक्रिया में मदद करता है। इसलिए बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में अनुभवी कोच की मौजूदगी अहम मानी जाती है।

अलीशा चौधरी ने कोच विकास को भेजने की मांग की

अलीशा चौधरी ने भारतीय ओलंपिक संघ से अपने कोच विकास को साथ भेजने की मांग की थी। उनका कहना है कि टीम लीडर की तुलना में उन्हें अपने कोच की जरूरत अधिक है। वह कोच के साथ लंबे समय से प्रशिक्षण ले रही हैं।

कोच प्रतियोगिता के दौरान वजन प्रबंधन में भी मदद करता है। इसके अलावा वह खिलाड़ी की रणनीति और तकनीक पर नजर रखता है। वहीं मैट के बाहर से मिलने वाला अनुभव भी प्रदर्शन में असर डाल सकता है।

एशियाई चैंपियन बनने के बाद बढ़ी उम्मीदें

बाली में आयोजित एशियाई सीनियर कराटे चैंपियनशिप में अलीशा ने इतिहास रचा था। उन्होंने महिला कुमिते के 55 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वह इस प्रतियोगिता में भारत के लिए स्वर्ण जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं।

उनकी उपलब्धि के बाद एशियाई खेलों में भी पदक की उम्मीद बढ़ी। हालांकि, कराटे महासंघ से जुड़े विवाद के कारण उनकी भागीदारी पर पहले अनिश्चितता थी। बाद में खेल मंत्रालय के हस्तक्षेप से उनका एशियाड जाना तय हुआ। चेतन भट्ट को भी भारतीय टीम में जगह मिली।

इस्तांबुल में कोच के साथ किया अभ्यास

एशियाई खेलों की तैयारी के लिए अलीशा चौधरी ने अपने कोच के साथ इस्तांबुल में प्रशिक्षण किया। यह कैंप 20 अगस्त से 3 सितंबर तक चला। तैयारी के दौरान कोच ने उनकी तकनीक और फिटनेस पर काम किया।

अब प्रतियोगिता के दौरान वही कोच उनके साथ मौजूद नहीं होंगे। इससे टीम प्रबंधन के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, भारतीय टीम की कोशिश बेहतर प्रदर्शन के साथ पदक जीतने की होगी।

खिलाड़ियों के सामने प्रमुख चुनौतियां:

  • मुकाबले के दौरान तकनीकी मार्गदर्शन की कमी।
  • रिव्यू प्रक्रिया में विशेषज्ञ कोच की अनुपस्थिति।
  • वजन प्रबंधन और रणनीति में अतिरिक्त जिम्मेदारी।
  • बड़े मुकाबलों में मानसिक और तकनीकी समर्थन की कमी।

भारतीय कराटे टीम से जुड़ी अहम बातें:

  • अलीशा 55 किलोग्राम कुमिते वर्ग में उतरेंगी।
  • चेतन भट्ट 84 किलोग्राम वर्ग में चुनौती देंगे।
  • टीम के साथ कोच की जगह टीम लीडर भेजा जा रहा है।
  • अलीशा एशियाई चैंपियनशिप में ऐतिहासिक स्वर्ण जीत चुकी हैं।

कुल मिलाकर, अलीशा चौधरी के सामने अब बड़ी चुनौती है। एक ओर उनके पास शानदार अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन का आत्मविश्वास है। दूसरी ओर कोच की अनुपस्थिति नई मुश्किल पैदा कर सकती है। अब नजर इस बात पर होगी कि भारतीय कराटे टीम एशियाई खेलों में कैसा प्रदर्शन करती है।


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