पिलाटीज़ वर्कआउट ट्रेंड के तहत रिफॉर्मर मशीन पर एक्सरसाइज़ करता व्यक्ति

पसीना बहा देने वाली हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग का जमाना अब पीछे छूटता दिख रहा है. फिटनेस बुकिंग प्लेटफॉर्म क्लासपास की 2025 लुक बैक रिपोर्ट के मुताबिक, पिलाटीज़ वर्कआउट ट्रेंड लगातार तीसरे साल दुनियाभर में सबसे ज्यादा बुक की जाने वाली फिटनेस क्लास बना हुआ है. यह बदलाव बताता है कि अब लोग तुरंत नतीजों की बजाय लंबे समय तक टिकने वाली फिटनेस को तरजीह दे रहे हैं.

आंकड़े कितने चौंकाने वाले हैं

रिपोर्ट के अनुसार 2024 के मुकाबले पिलाटीज़ की बुकिंग में 66% तक का उछाल आया है. इसमें भी रिफॉर्मर पिलाटीज़ की बुकिंग सबसे तेज़ी से बढ़ी, जिसमें 71% की ग्रोथ दर्ज हुई, जो प्लेटफॉर्म के इतिहास की किसी भी सब-कैटेगरी की सबसे बड़ी छलांग है. दुनियाभर में करीब 1.5 करोड़ बुकिंग के साथ यह सबसे ज्यादा सर्च और सबसे ज्यादा दोबारा बुक की जाने वाली क्लास बन चुकी है.

लोग इसे इतना क्यों पसंद कर रहे हैं

  • जोड़ों पर ज्यादा दबाव डाले बिना मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
  • सही ब्रीदिंग और शरीर की सही पोश्चर पर खास ध्यान दिया जाता है
  • हर मूवमेंट रोज़मर्रा की गतिविधियों में काम आने वाले पैटर्न पर आधारित है
  • उम्र बढ़ने के साथ बैलेंस और मोबिलिटी बनाए रखने में मददगार माना जाता है
  • हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट के मुकाबले चोट लगने का खतरा काफी कम रहता है

40 पार करने वालों में यह ट्रेंड क्यों तेज़ी से बढ़ा

लंबी उम्र तक एक्टिव और फिट रहना चाहने वाले, खासकर 40 साल से ऊपर के लोग, पिलाटीज़ वर्कआउट ट्रेंड को खासतौर पर अपना रहे हैं. वजह साफ है, यह जोड़ों पर दबाव डाले बिना मोबिलिटी, बैलेंस और मसल स्ट्रेंथ तीनों को एक साथ बेहतर बनाने में मदद करता है. कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि नियमित अभ्यास से उम्रदराज लोगों में बैलेंस से जुड़ी दिक्कतें कम हो सकती हैं.

पारंपरिक जिम वर्कआउट से पिलाटीज़ वर्कआउट ट्रेंड कितना अलग है

हैवी वेट ट्रेनिंग में मांसपेशियों पर तुरंत ज्यादा दबाव डाला जाता है, जिससे नतीजे भले जल्दी दिखें, लेकिन चोट लगने का खतरा भी उतना ही बढ़ जाता है. पिलाटीज़ वर्कआउट ट्रेंड इसके ठीक उलट, धीमी और नियंत्रित मूवमेंट पर टिका है, जिससे शरीर पर दबाव कम पड़ता है और इसे बिना रुके सालों तक जारी रखा जा सकता है. यही वजह है कि इसे “सस्टेनेबल फिटनेस” यानी लंबे समय तक चलने वाली फिटनेस का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है.

घर से भी शुरुआत की जा सकती है

पिलाटीज़ के लिए महंगे स्टूडियो या रिफॉर्मर मशीन का होना जरूरी नहीं है. मैट पिलाटीज़ घर पर भी शुरू की जा सकती है, जिसके लिए सिर्फ एक योगा मैट काफी है. शुरुआत में बेसिक ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ और कोर स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले आसान मूवमेंट से शुरुआत करना बेहतर रहता है, ताकि शरीर धीरे-धीरे तकनीक के हिसाब से ढल सके.

अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य फिटनेस जागरूकता के लिए है, चिकित्सीय या प्रोफेशनल ट्रेनर की सलाह नहीं. कोई भी नया वर्कआउट शुरू करने से पहले, खासकर पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में, डॉक्टर या सर्टिफाइड ट्रेनर से सलाह जरूर लें.

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