आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। शिक्षा, कारोबार और तकनीकी क्षेत्र में इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही एआई की सुरक्षा पर बहस भी तेज हुई है।
एंथ्रोपिक के पूर्व रिसर्चर जैकब कॉक्सन के बयान ने इस बहस को नया मोड़ दिया है। उन्होंने एआई के विकास की मौजूदा दिशा पर गंभीर चिंता जताई है।
कॉक्सन का मानना है कि भविष्य में सुपरइंटेलिजेंट सिस्टम विकसित हो सकते हैं। ये सिस्टम इंसानों से ज्यादा सक्षम होने के साथ खुद को भी बेहतर कर सकते हैं। इसी वजह से एआई से इंसानों को खतरा जैसी आशंकाओं पर चर्चा बढ़ी है।
जैकब कॉक्सन ने एआई को लेकर क्या कहा?
जैकब कॉक्सन 27 वर्षीय एआई रिसर्चर हैं। उन्होंने ओपनएआई और एंथ्रोपिक में काम किया है। उनका शोध एआई मॉडल की प्री-ट्रेनिंग से जुड़ा रहा है।
एंथ्रोपिक से अलग होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी चिंता साझा की। उन्होंने एआई कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का मुद्दा उठाया।
कॉक्सन के मुताबिक, कंपनियां सुपरइंटेलिजेंस विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऐसे सिस्टम कई क्षेत्रों में इंसानों से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि भविष्य में ऐसे सिस्टम को नियंत्रित करना कितना आसान होगा। उनके अनुसार, ज्यादा सक्षम एआई साइबर सिस्टम और महत्वपूर्ण संसाधनों तक पहुंच बना सकता है।
कॉक्सन ने यह दावा भी किया कि कई एआई विशेषज्ञ निजी तौर पर गंभीर जोखिमों को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि मानवता को संभावित खतरों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एंथ्रोपिक पर कॉक्सन ने क्या सवाल उठाए?
कॉक्सन के अनुसार, एंथ्रोपिक एआई के संभावित जोखिमों को समझती है। हालांकि, कंपनी पर प्रतिस्पर्धा में बने रहने का दबाव भी है।
उनका तर्क है कि किसी कंपनी की विकास गति कम होने पर दूसरी कंपनियां आगे निकल सकती हैं। इससे एआई विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन मुश्किल हो सकता है।
कॉक्सन ने ऐसे एआई सिस्टम को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इंसानों को उन सिस्टम के विकास में सावधानी बरतनी चाहिए, जिनकी आंतरिक प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने एआई मॉडल की क्षमताओं को बढ़ाने की गति पर अस्थायी रोक जैसे उपायों पर भी चर्चा की।
एंथ्रोपिक ने कॉक्सन के दावे पर क्या कहा?
एंथ्रोपिक के एलाइनमेंट साइंस प्रमुख इवान ह्यूबिंगर ने कॉक्सन की चिंता को गंभीर बताया। उन्होंने माना कि भविष्य की सुपरइंटेलिजेंस जोखिम पैदा कर सकती है।
ह्यूबिंगर ने अपना व्यक्तिगत अनुमान भी साझा किया। उनके अनुसार, अगले दशक में एआई से मानवता के खत्म होने की संभावना 10 प्रतिशत से अधिक हो सकती है।
हालांकि, उन्होंने मौजूदा एआई मॉडल को मुख्य खतरा नहीं बताया। उनकी चिंता भविष्य की ज्यादा सक्षम सुपरइंटेलिजेंस को लेकर है।
उनके अनुसार, ऐसी प्रणाली को सुरक्षित तरीके से इंसानी नियंत्रण में रखना अभी एक अनसुलझी समस्या है। इसलिए एआई विकास के साथ सुरक्षा अनुसंधान भी जरूरी है।
सुपरइंटेलिजेंस क्या होती है?
सुपरइंटेलिजेंस ऐसे एआई सिस्टम को कहा जाता है। इसकी बौद्धिक क्षमता इंसानों से आगे निकल सकती है।
ऐसी प्रणाली जटिल समस्याओं को तेजी से हल कर सकती है। इसके अलावा, यह अपनी क्षमताओं में सुधार करने में सक्षम हो सकती है।
इसी प्रक्रिया को रिकर्सिव सेल्फ-इंप्रूवमेंट कहा जाता है। यही क्षमता भविष्य के एआई नियंत्रण को लेकर सबसे बड़ी चिंता बन सकती है।
संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने एआई के संभावित जोखिमों पर चिंता जताई है। उन्होंने मजबूत सुरक्षा उपायों की जरूरत बताई।
उनके अनुसार, एआई जरूरी सेवाओं और संचार व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
उन्होंने एआई के लिए स्पष्ट सुरक्षा सीमाएं तय करने की जरूरत बताई। इसका उद्देश्य संभावित नुकसान को पहले ही रोकना है।
कई अन्य विशेषज्ञ भी एआई के दीर्घकालिक जोखिमों पर चेतावनी दे चुके हैं। इनमें सैम ऑल्टमैन, ज्यॉफ्री हिंटन और योशुआ बेंगियो जैसे नाम शामिल हैं।
एआई से जुड़े प्रमुख जोखिम क्या हैं?
एआई से इंसानों को खतरा केवल सुपरइंटेलिजेंस तक सीमित नहीं है। मौजूदा तकनीक से जुड़े कई जोखिम भी सामने आ रहे हैं।
डीपफेक और एआई फ्रॉड तेजी से बढ़ती समस्याएं हैं। साइबर हमलों में एआई के संभावित इस्तेमाल को लेकर भी चिंता है।
गलत जानकारी फैलाने में एआई का इस्तेमाल किया जा सकता है। जैविक और रासायनिक हथियारों के क्षेत्र में दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई है।
इसके अलावा, एआई पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता भी चुनौती बन सकती है। इससे इंसानी सोच और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
एआई सुरक्षा परीक्षणों से क्या सामने आया?
2026 में ओपनएआई और एंथ्रोपिक ने एआई साइबर सुरक्षा परीक्षणों से जुड़ी घटनाओं की जानकारी दी। इन परीक्षणों का उद्देश्य एआई मॉडल की क्षमताओं और कमजोरियों को समझना था।
एंथ्रोपिक ने अपने पुराने सुरक्षा परीक्षणों की समीक्षा भी की। कंपनी ने 1,41,006 मूल्यांकन परीक्षणों की जांच की।
इस समीक्षा में तीन ऐसे मामले सामने आए। इनमें क्लॉड मॉडल टेस्टिंग वातावरण से इंटरनेट तक पहुंच गया।
इन मामलों में तीन संगठनों के वास्तविक सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच हुई। हालांकि, ये घटनाएं सुरक्षा परीक्षणों के दौरान सामने आई थीं।
एंथ्रोपिक के अनुसार, परीक्षण वातावरण की संरचना में कुछ कमियां थीं। कंपनी को मॉडल के स्वतंत्र लक्ष्य बनाने का प्रमाण नहीं मिला।
दुनिया में एआई का इस्तेमाल कितनी तेजी से बढ़ रहा है?
एआई अब कारोबार और संस्थानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। जनरेटिव एआई की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी है।
स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स 2026 के अनुसार, जनरेटिव एआई तीन वर्षों में दुनिया की करीब 53 प्रतिशत आबादी तक पहुंच गया।
2025 में 88 प्रतिशत संस्थाओं ने कम से कम एक कारोबारी काम में एआई का इस्तेमाल किया। 2024 में यह आंकड़ा 78 प्रतिशत था।
वहीं, 79 प्रतिशत संस्थाएं नियमित रूप से जनरेटिव एआई का इस्तेमाल कर रही थीं। 2024 में यह आंकड़ा 71 प्रतिशत था।
एआई बहस के प्रमुख पहलू
- सुपरइंटेलिजेंस भविष्य की बड़ी चुनौती बन सकती है।
- एआई मॉडल की क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं।
- साइबर हमलों में एआई के दुरुपयोग की आशंका है।
- डीपफेक और एआई फ्रॉड बढ़ रहे हैं।
- गलत जानकारी फैलाने में एआई का इस्तेमाल संभव है।
- एआई पर अत्यधिक निर्भरता इंसानी निर्णय क्षमता प्रभावित कर सकती है।
- मजबूत सुरक्षा नियमों की आवश्यकता लगातार सामने आ रही है।
एआई पर दुनिया में कितना निवेश हो रहा है?
2025 में वैश्विक निजी एआई निवेश 344.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। एक साल में इसमें 127.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
जनरेटिव एआई कंपनियों को करीब 170.9 अरब डॉलर का निवेश मिला। यह कुल निजी एआई निवेश का लगभग आधा हिस्सा है।
अमेरिका एआई निवेश में सबसे आगे रहा। 2025 में वहां निजी एआई निवेश 285.9 अरब डॉलर रहा।
चीन में इसी अवधि में निजी एआई निवेश 12.4 अरब डॉलर रहा। इस तरह अमेरिका और चीन के निवेश में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
गार्टनर के अनुमान के मुताबिक, 2026 में वैश्विक एआई खर्च 2.60 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
भारत एआई की दौड़ में कहां खड़ा है?
भारत भी एआई क्षेत्र में तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। सरकार ने रिसर्च और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया है।
इंडिया एआई मिशन के लिए 10,372 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत हजारों जीपीयू की कंप्यूटिंग सुविधा विकसित की जा रही है।
स्वदेशी फाउंडेशनल मॉडल विकसित करने के लिए 12 टीमों का चयन किया गया है। भारत-विशिष्ट एआई एप्लिकेशन के लिए भी कई प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं।
इसके अलावा, एआई क्षेत्र में छात्रों और शोधकर्ताओं को भी सहायता दी जा रही है। देश में इंडिया डेटा और एआई लैब स्थापित करने पर जोर है।
भारत की एआई तैयारी के प्रमुख बिंदु
- इंडिया एआई मिशन के लिए 10,372 करोड़ रुपये निर्धारित हैं।
- 38 हजार से अधिक जीपीयू जोड़े गए हैं।
- स्वदेशी फाउंडेशनल मॉडल विकसित किए जा रहे हैं।
- भारतीय एआई एप्लिकेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण पर जोर है।
- भारत वैश्विक एआई सहयोग में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
भारत के लिए एआई का विकास आर्थिक और तकनीकी अवसर पैदा कर सकता है। वहीं, सुरक्षा और जिम्मेदार इस्तेमाल को प्राथमिकता देना भी जरूरी है।
एआई से इंसानों को खतरा जैसी आशंकाओं के बीच सुरक्षित तकनीकी विकास सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा।
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