छत्तीसगढ़ में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने पर सरकार का जोर है। जल जीवन मिशन के तहत बाकी कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसके लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने समयसीमा के साथ गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया।
रायपुर में 10 सितंबर को इस संबंध में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में जल संसाधन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान जल संचय अभियान की प्रगति की जानकारी ली गई। साथ ही, विभिन्न जिलों में चल रहे कार्यों की समीक्षा हुई।
जल संरक्षण में जिलों की भूमिका अहम
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि जल बचाने के प्रयास केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रहने चाहिए। स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
कोरिया, धमतरी और राजनांदगांव के प्रयासों को बैठक में सराहा गया। इन जिलों में अपनाए गए अच्छे मॉडल दूसरे क्षेत्रों में लागू होंगे। इससे जल संरक्षण से जुड़े अभियानों को नई दिशा मिल सकती है।
अधिकारियों को अभियान की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए। वहीं, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने की बात कही गई। मुख्य सचिव स्तर पर भी इसकी नियमित समीक्षा होगी।
जल जीवन मिशन के काम होंगे तेज
जल जीवन मिशन के अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को लगातार प्रगति की समीक्षा करने कहा। प्रशासनिक और तकनीकी समस्याओं को जल्द दूर करने के निर्देश दिए गए।
सरकार का उद्देश्य केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं है। परिवारों को नियमित और सुरक्षित पेयजल मिलना भी जरूरी है। इसलिए योजनाओं के संचालन पर भी लगातार नजर रखी जाएगी।
मार्च 2028 की तय समयसीमा
बैठक में विभिन्न जल संरचनाओं से जुड़े कार्यों की स्थिति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने मार्च 2028 तक निर्धारित कार्य पूरे करने कहा। इसके लिए जिला स्तर पर प्रभावी निगरानी जरूरी बताई गई।
अधिकारियों को लंबित कार्यों की वजह पहचानने को कहा गया। समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से करने के निर्देश मिले। इससे निर्माण कार्यों की रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलेगी।
जिलों में जल सुरक्षा पर विशेष ध्यान
जल जीवन मिशन के साथ जल संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी। प्रत्येक क्षेत्र की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार योजनाएं तैयार होंगी। विभागों के बीच समन्वय से इन योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने जल स्रोतों के संरक्षण को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। सुरक्षित जल स्रोत ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरत पूरी करने में मदद करेंगे। इससे लंबे समय तक पेयजल उपलब्धता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
गुणवत्तापूर्ण कार्यों का समय पर भुगतान
बैठक में पूर्ण हो चुके निर्माण कार्यों के भुगतान पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने गुणवत्तापूर्ण कार्यों का भुगतान समय पर करने के निर्देश दिए।
भुगतान में अनावश्यक देरी से परियोजनाओं की गति प्रभावित होती है। इसलिए जिला स्तर पर भुगतान प्रक्रिया की निगरानी होगी। संबंधित अधिकारियों को लंबित मामलों का समाधान करने कहा गया।
समीक्षा बैठक में लिए गए अहम फैसले
- मार्च 2028 तक तय जल संरचनाओं को पूरा किया जाएगा।
- जल संचय अभियानों की लगातार समीक्षा होगी।
- जिलों में जल संरक्षण गतिविधियों को बढ़ाया जाएगा।
- गुणवत्तापूर्ण पूर्ण कार्यों का भुगतान समय पर होगा।
- बेहतर जिलों के प्रभावी मॉडल अन्य क्षेत्रों में अपनाए जाएंगे।
छत्तीसगढ़ में बनेगा बेहतर जल संरक्षण मॉडल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य जल संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर उदाहरण पेश कर सकता है। इसके लिए प्रशासन के साथ आम लोगों की भागीदारी जरूरी है। जल जीवन मिशन के प्रभावी संचालन से ग्रामीण परिवारों को फायदा मिलेगा।
हर जिले को अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम करना होगा। जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्जीवन भी महत्वपूर्ण रहेगा। इससे भविष्य की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
जल सुरक्षा के लिए इन कामों पर जोर
- पुराने और जरूरी जल स्रोतों का संरक्षण होगा।
- पेयजल ढांचे की नियमित निगरानी की जाएगी।
- नल के जरिए स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
- तकनीकी बाधाओं का तेजी से समाधान होगा।
- विभागों के बीच समन्वय को बेहतर बनाया जाएगा।
जनभागीदारी से बढ़ेगा जल संरक्षण
जल संचय और पेयजल योजनाओं को जनभागीदारी से मजबूत करने की तैयारी है। जल जीवन मिशन से जुड़े कार्यों में समयसीमा और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान रहेगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लक्ष्य आधारित तरीके से काम करने कहा। साथ ही, हर स्तर पर प्रगति की निगरानी करने के निर्देश दिए। सरकार का फोकस दीर्घकालीन जल सुरक्षा और बेहतर पेयजल व्यवस्था पर है।
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