मध्य प्रदेश में मानसून का दौर अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। फिर भी एमपी में मानसून की गतिविधियां अगले कुछ दिनों तक जारी रहेंगी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 18 से 21 सितंबर के बीच प्रदेश में बारिश हो सकती है। इस दौरान कई इलाकों में गरज-चमक और तेज हवा की स्थिति भी बन सकती है।
प्रदेश में इस सीजन अब तक 842.1 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई है। यह करीब 33.1 इंच के बराबर है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 905.3 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश में करीब 2.5 इंच बारिश कम हुई है। बारिश का आंकड़ा सामान्य से लगभग 7 प्रतिशत कम है।
बारिश की कमी वाले जिलों के लिए अहम दिन
आने वाले चार से पांच दिन मध्य प्रदेश के कई जिलों के लिए महत्वपूर्ण हैं। एमपी में मानसून के अंतिम दौर में होने वाली बारिश से कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सुधर सकता है। खासतौर पर पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा बनी हुई है।
दूसरी ओर, पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थिति सामान्य के आसपास पहुंच गई है। प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य या सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन और ग्वालियर शामिल हैं। इसके अलावा शिवपुरी, गुना, छतरपुर और निवाड़ी में भी अच्छी बारिश हुई है।
मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया भी सामान्य या अधिक बारिश वाले जिलों में शामिल हैं। वहीं, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर सहित 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है।
एमपी में मानसून पर दो मौसम प्रणालियों की नजर
मौसम विभाग के मुताबिक, सौराष्ट्र और उससे लगे उत्तर-पूर्वी अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बना है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है। इसके साथ ही मानसून ट्रफ भी सक्रिय बनी हुई है।
यह ट्रफ राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुंच रही है। इन प्रणालियों के कारण मध्य भारत में नमी मिल रही है। इसलिए 18 और 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।
19 सितंबर के बाद बंगाल की खाड़ी में एक नया सिस्टम बनने के संकेत भी हैं। उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी वायु परिसंचरण उत्तर अंडमान सागर की तरफ बढ़ सकता है। इसके प्रभाव से वहां कम दबाव का क्षेत्र विकसित होने की संभावना है।
22 सितंबर से कम होगी बारिश
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, एमपी में मानसून की सक्रियता 21 सितंबर तक बनी रह सकती है। इसके बाद बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। 22 सितंबर से प्रदेश में बारिश का दौर सीमित हो सकता है।
मानसून की विदाई सितंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होने का अनुमान है। इसकी शुरुआत पश्चिमी राजस्थान से होने की संभावना जताई गई है। इसके बाद मध्य प्रदेश से भी मानसून धीरे-धीरे विदा हो सकता है।
ऐसे में अगले कुछ दिन बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे। एमपी में मानसून की आखिरी बारिश से कम बारिश वाले जिलों को राहत मिल सकती है। हालांकि, बारिश का असर सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं रहने की संभावना है।
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