छत्तीसगढ़ को आयुष्मान भारत सम्मान मिलने की उपलब्धि सामने आई है। राज्य को पोर्टेबिलिटी क्लेम के बेहतर निपटारे पर सम्मान मिला है। यह सम्मान नई दिल्ली में आयोजित आरोग्य मंथन 2026 में दिया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अधिकारी शामिल हुए। आयुष्मान भारत योजना के संचालन पर भी चर्चा हुई। साथ ही, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं पर विचार किया गया। पोर्टेबिलिटी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे पात्र लाभार्थी दूसरे राज्यों में इलाज करा सकते हैं।
पोर्टेबिलिटी क्लेम निपटारे में मिली पहचान
छत्तीसगढ़ को आयुष्मान भारत सम्मान पोर्टेबिलिटी क्लेम के लिए मिला। राज्य में ऐसे मामलों के निपटारे पर विशेष ध्यान दिया गया। क्लेम प्रक्रिया की तकनीकी निगरानी भी की जाती है। इसके अलावा, अस्पतालों के साथ बेहतर समन्वय किया जाता है। पोर्टेबिलिटी सुविधा से राज्य की सीमा बाधा नहीं बनती। पात्र लाभार्थी दूसरे राज्यों में उपचार करा सकते हैं। उन्हें योजना से जुड़े अस्पतालों में कैशलेस इलाज मिलता है। यह सुविधा दूसरे राज्यों में काम करने वालों के लिए उपयोगी है। प्रवासी श्रमिक भी इसका लाभ उठा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर परिवार बाहर इलाज करा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को दी बधाई
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वास्थ्य विभाग को बधाई दी। उन्होंने विभाग की टीम के प्रयासों की सराहना की। साथ ही, पात्र लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने समय पर इलाज मिलने की जरूरत बताई। उन्होंने आर्थिक कारणों से इलाज रुकने की समस्या का जिक्र किया। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बनाने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, आयुष्मान भारत सम्मान सामूहिक प्रयास का परिणाम है। इसमें अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही। चिकित्सकों और अस्पतालों का सहयोग भी अहम रहा।
दूसरे राज्यों में इलाज की सुविधा
आयुष्मान भारत में राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी सुविधा उपलब्ध है। इसके तहत पात्र लाभार्थी दूसरे राज्यों में इलाज करा सकते हैं। इसके लिए अस्पताल का योजना से जुड़ा होना जरूरी है। 30 जून 2026 तक 29.05 लाख प्रवेश अधिकृत हुए थे। ये मामले अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी से जुड़े थे। इन मामलों की अधिकृत राशि 8,383.97 करोड़ रुपये से अधिक थी। इस सुविधा से लाभार्थियों को कई फायदे मिलते हैं। उन्हें दूसरे राज्य में इलाज की सुविधा मिलती है। संबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार मिलता है। क्लेम प्रक्रिया में डिजिटल व्यवस्था का उपयोग होता है।
क्लेम प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर जोर
राज्य में क्लेम प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है। इसके लिए तकनीकी निगरानी पर ध्यान दिया जा रहा है। अस्पतालों के साथ बेहतर समन्वय भी किया जा रहा है। लंबित मामलों के समय पर निपटारे पर जोर है। इससे लाभार्थियों को कम परेशानी होने की उम्मीद है। साथ ही, प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास है। राष्ट्रीय स्तर पर आयुष्मान भारत सम्मान मिलने के बाद प्रयास जारी हैं। स्वास्थ्य विभाग व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर देगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताई विभाग की प्राथमिकता
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की टीम को बधाई दी। उन्होंने पात्र परिवारों तक योजना पहुंचाने पर जोर दिया। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की बात कही। क्लेम प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने समयबद्ध क्लेम निपटारे को जरूरी बताया। साथ ही, जरूरतमंद परिवारों तक इलाज पहुंचाने की बात कही।
डिजिटल तकनीक से मजबूत होगा स्वास्थ्य तंत्र
आरोग्य मंथन 2026 में डिजिटल स्वास्थ्य पर चर्चा हुई। क्लेम प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य डेटा की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। ABDM डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। 17 सितंबर 2026 तक 97.61 करोड़ ABHA सक्रिय थे। इसी अवधि में 119.95 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड जुड़े थे। डिजिटल व्यवस्था से स्वास्थ्य सेवाएं आसान हो सकती हैं। इससे रिकॉर्ड संभालना भी सरल हो सकता है। क्लेम प्रक्रिया में भी तकनीक मददगार साबित होती है। आयुष्मान भारत योजना देशभर में स्वास्थ्य कवरेज बढ़ा रही है। पोर्टेबिलिटी सुविधा से इलाज की पहुंच बढ़ती है। इससे दूसरे राज्यों में रहने वाले लाभार्थियों को मदद मिलती है।
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