खुशबूदार क्लीनर का असर दिखाता चित्र, खुली खिड़की के पास फर्श पर पोछा लगाती महिला

दिवाली से पहले घर-घर में पोछा, बाथरूम क्लीनर और रूम फ्रेशनर की खपत बढ़ जाती है. लेकिन अमेरिका की पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के एक प्रयोग ने खुशबूदार क्लीनर का असर घर की हवा पर दिखाया है. शोधकर्ताओं के मुताबिक इन उत्पादों की खुशबू हवा में मौजूद ओज़ोन से मिलकर मिनटों में बेहद महीन कण बना देती है. इसलिए इस बार सफाई के तरीके पर थोड़ा ध्यान देना समझदारी होगी.

सफाई के दौरान खुशबू से हवा में क्या बनता है

खुशबूदार क्लीनर का असर हवा में तुरंत शुरू होता है. खुशबू के टरपीन नाम के रसायन घर की ओज़ोन से प्रतिक्रिया करते हैं. इससे 1 से 30 नैनोमीटर के कण बनते हैं. ये सांस के साथ फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं. आम घरेलू एयर मॉनिटर इन्हें अक्सर नहीं पकड़ते.

रिसर्च से जुड़ी काम की जानकारी

  • प्रयोग पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के कैंपस पर बने एक मॉडल घर में हुआ.
  • नतीजे अगस्त 2026 में अमेरिकन केमिकल सोसाइटी (ACS) की शिकागो बैठक में रखे गए.
  • साधारण और ‘बॉटनिकल’ यानी पौधों से बने, दोनों तरह के खुशबूदार क्लीनर में कण बने.
  • कणों की मात्रा व्यस्त सड़क के ट्रैफिक प्रदूषण जितनी या उससे ज़्यादा आंकी गई.
  • शोधकर्ताओं ने वेंटिलेशन और कम खुशबू वाले उत्पादों की सलाह दी है.

टरपीन और ओज़ोन क्या हैं

टरपीन वे रसायन हैं जो नींबू, संतरा या चीड़ जैसी खुशबू देते हैं. लिमोनीन और पाइनीन इसके आम उदाहरण हैं. दरअसल, ज़्यादातर “फ्रेश” खुशबू वाले क्लीनर में यही डाले जाते हैं.

वहीं ओज़ोन एक गैस है जो बाहर की हवा से खिड़की-दरवाज़ों के रास्ते घर में आती है. कुछ उपकरण भी इसे बनाते हैं. जब टरपीन और ओज़ोन मिलते हैं, तो नए कण बनने लगते हैं.

मॉडल घर में क्या दिखा

शोध टीम का नेतृत्व सिविल इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर ब्रैंडन बूर कर रहे थे. टीम ने असली घर जैसा ढांचा इस्तेमाल किया, जिसमें रसोई, लकड़ी का फर्श और बाथरूम था. फिर सामान्य सफाई करते हुए हवा को लगातार मापा गया.

नतीजतन पता चला कि सफाई के दौरान घर के अंदर टरपीन का स्तर जंगल की खुली हवा से दसियों से सैकड़ों गुना तक पहुंच गया. साथ ही सफाई शुरू होने के कुछ ही मिनटों में अरबों से खरबों महीन कण बनने लगे. बूर के मुताबिक हवा में धुआं या धूल न दिखने पर भी ये कण बन रहे होते हैं.

क्या खुशबूदार क्लीनर का असर सेहत पर पड़ता है

यह सवाल अभी पूरी तरह हल नहीं है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इतने छोटे कण सांस की नली में जम सकते हैं. हालांकि इनसे सूजन या जलन की आशंका जताई गई है, पर यह सीधा साबित नहीं हुआ है. इसके अलावा यह नतीजा एक वैज्ञानिक बैठक में पेश हुआ है, किसी जर्नल में छपा पूरा पेपर नहीं है.

इसलिए घबराने की ज़रूरत नहीं है. फिर भी जिन लोगों को अस्थमा या सांस की दिक्कत है, उन्हें सफाई के समय ज़्यादा सावधानी रखनी चाहिए. घर के छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों पर भी यही बात लागू होती है.

खुशबूदार क्लीनर का असर कम करने के 6 आसान तरीके

दिवाली की सफाई रोकने की ज़रूरत नहीं है. बस कुछ आदतें बदलनी होंगी.

1. सबसे पहले, सफाई करते समय खिड़कियां खोलें और रसोई-बाथरूम का एग्जॉस्ट फैन चलाएं.

2. इसके अलावा जहां हो सके, बिना खुशबू या कम खुशबू वाले उत्पाद चुनें.

3. साथ ही एक ही कमरे में एक साथ कई खुशबूदार उत्पाद न लगाएं. जैसे पोछे के बाद तुरंत रूम स्प्रे न करें.

4. ध्यान रहे, बोतल पर लिखी मात्रा से ज़्यादा क्लीनर न डालें. ज़्यादा झाग का मतलब ज़्यादा सफाई नहीं है.

5. वहीं ओज़ोन बनाने वाले UV-C लैंप या “ओज़ोन जनरेटर” को सफाई के साथ न चलाएं.

6. आखिर में, सफाई के बाद कुछ देर कमरा खुला छोड़ दें और फिर ही वहां बैठें.

दिवाली की सफाई में किन बातों पर ध्यान दें

हमारे यहां त्योहार से पहले पूरे घर की गहरी सफाई होती है. ऐसे में कई दिन तक रोज़ क्लीनर का इस्तेमाल होता है. इसलिए सफाई को एक दिन में निपटाने के बजाय कमरे के हिसाब से बांट लें.

उदाहरण के लिए, सुबह हवा साफ और ठंडी हो तो उस समय खिड़कियां खोलकर काम करें. वहीं जिस कमरे में बच्चे सोते हैं, वहां सफाई के तुरंत बाद उन्हें न सुलाएं. दरअसल, थोड़ी सी योजना से त्योहार की तैयारी भी हो जाएगी और हवा भी बेहतर रहेगी.

खुशबूदार क्लीनर का असर: पाठकों के आम सवाल

क्या ‘नेचुरल’ या ‘हर्बल’ क्लीनर सुरक्षित हैं?

ज़रूरी नहीं. पर्ड्यू की टीम ने पौधों से बने खुशबूदार उत्पादों में भी कण बनते देखे. दरअसल, खुशबू का स्रोत प्राकृतिक हो या रासायनिक, टरपीन दोनों में हो सकते हैं.

क्या घर का एयर प्यूरीफायर इन कणों को रोक देगा?

यह प्यूरीफायर के फिल्टर पर निर्भर करता है. हालांकि रिसर्च में सबसे आसान उपाय वेंटिलेशन ही बताया गया है. इसलिए पहले खिड़की और एग्जॉस्ट फैन पर भरोसा करें.

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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