अनार यूरोलिथिन ए: कटे अनार के दानों के पास दिल का सादा मेडिकल इलस्ट्रेशन

अनार, अखरोट और कुछ बेरी खाने के बाद हमारी आंत एक खास तत्व बनाती है. इसका नाम यूरोलिथिन ए है. अब अनार यूरोलिथिन ए पर लंदन के किंग्स कॉलेज की नई रिसर्च चर्चा में है. जानवरों पर हुए प्रयोग में इससे दिल के काम करने के कुछ पैमानों में 80% तक सुधार दिखा.

अनार यूरोलिथिन ए पर नई स्टडी में क्या मिला

किंग्स कॉलेज लंदन की टीम ने पाया कि यूरोलिथिन ए दिल की एक खास तरह की कमज़ोरी में मदद कर सकता है. इसमें दिल पंप तो करता है, पर धड़कनों के बीच ठीक से ढीला नहीं हो पाता. जानवरों पर हुए प्रयोग में दिल के कुछ पैमाने 80% तक सुधरे. हालांकि इंसानों पर ट्रायल अभी बाकी है.

रिसर्च से जुड़े ज़रूरी तथ्य

  • प्रकाशन: Science Advances जर्नल, सितंबर 2026.
  • टीम: किंग्स कॉलेज लंदन, ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की फंडिंग से.
  • बीमारी: HFpEF यानी प्रिज़र्व्ड इजेक्शन फ्रैक्शन वाला हार्ट फेलियर.
  • नतीजा: जानवरों के मॉडल में दिल के कुछ पैमानों में 80% तक सुधार.
  • सीमा: इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल अभी नहीं हुआ है.

HFpEF क्या है और यह आम क्यों है

हार्ट फेलियर का मतलब दिल का अचानक रुकना नहीं है. दरअसल इसमें दिल शरीर की ज़रूरत के मुताबिक खून पंप नहीं कर पाता. HFpEF में दिल की पंप करने की ताकत लगभग ठीक रहती है. लेकिन दिल की दीवार सख्त हो जाती है. इसलिए दो धड़कनों के बीच दिल पूरा खून नहीं भर पाता.

ScienceDaily के मुताबिक ब्रिटेन में हार्ट फेलियर के करीब आधे मामले इसी तरह के हैं. यानी वहां लगभग पांच लाख लोग इससे जूझ रहे हैं. ऐसे मरीज़ों को सांस फूलने और थकान की शिकायत रहती है. फिलहाल इसके इलाज के विकल्प सीमित माने जाते हैं.

यूरोलिथिन ए दिल पर कैसे असर करता है

रिसर्च के मुताबिक यूरोलिथिन ए दिल में PKG1α नाम के एक प्रोटीन को सक्रिय करता है. यह प्रोटीन दिल की मांसपेशी को आराम देने और नसों के ठीक काम करने से जुड़ा है. इसके बाद दिल धड़कनों के बीच बेहतर ढंग से ढीला हो पाया.

इसके अलावा प्रयोगों में दिल के ऊतक में घाव जैसे सख्त हिस्से यानी फाइब्रोसिस कम हुए. साथ ही दिल की मांसपेशी कोशिकाओं का असामान्य रूप से बड़ा होना भी घटा. Newsweek के मुताबिक जानवरों की व्यायाम करने की क्षमता भी बेहतर हुई. वहीं लैब में बनाए गए इंसानी दिल के ऊतक पर भी आराम वाला असर दिखा.

क्या अब रोज़ अनार खाना चाहिए

यह सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाएगा. लेकिन रिसर्च टीम ने खुद इस पर सावधानी बरतने को कहा है. किंग्स कॉलेज के डॉ. जोसेफ बर्गॉयन के मुताबिक अभी इतने सबूत नहीं हैं कि हार्ट फेलियर के इलाज के लिए अनार खाने की सलाह दी जाए.

इसकी एक बड़ी वजह भी है. Newsweek के अनुसार अनार में यूरोलिथिन ए सीधे बड़ी मात्रा में नहीं होता. यह आंत के बैक्टीरिया की मदद से बनता है. साथ ही हर इंसान का शरीर इसे बराबर मात्रा में नहीं बना पाता. यानी एक ही अनार अलग-अलग लोगों में अलग असर दिखा सकता है.

अनार यूरोलिथिन ए की इस खबर को उम्मीद की तरह देखें, इलाज की तरह नहीं. अनार फल के तौर पर संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है. फिर भी दिल की बीमारी में दवा की जगह इसे न रखें.

सप्लीमेंट खरीदने से पहले ये बातें जानें

बाज़ार में यूरोलिथिन ए के सप्लीमेंट भी मिलते हैं. ScienceDaily के मुताबिक पहले की इंसानी स्टडीज़ में यह तत्व सुरक्षित पाया गया था. हालांकि सुरक्षित होना और दिल की बीमारी में असरदार होना, दो अलग बातें हैं. इसलिए अनार यूरोलिथिन ए से जुड़े किसी भी उत्पाद को दिल की दवा का विकल्प न समझें. पैक पर लिखी मात्रा और दावे ध्यान से पढ़ें.

  • दिल की दवा चल रही हो, तो कोई भी सप्लीमेंट डॉक्टर से पूछे बिना शुरू न करें.
  • “दिल ठीक करने” जैसे दावों वाले विज्ञापनों से सावधान रहें.
  • सांस फूलना, पैरों में सूजन या जल्दी थकान हो, तो हृदय रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं.
  • चल रही दवा को खुद से बंद या कम न करें.

रिसर्च की सीमाएं और आगे का रास्ता

सबसे पहले, सबसे बड़ा सुधार जानवरों के मॉडल में दिखा है. इंसानों में दिल की बीमारी कहीं ज़्यादा जटिल होती है. इसके अलावा उम्र, डायबिटीज़ और ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियां भी असर बदल देती हैं. इसलिए अनार यूरोलिथिन ए पर अगला कदम इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल होगा. उसके बाद ही पता चलेगा कि यह इलाज बन सकता है या नहीं.

इस रिसर्च से जुड़े आम सवाल

क्या यूरोलिथिन ए सिर्फ अनार से बनता है?

नहीं. रिसर्च टीम के मुताबिक अखरोट और कुछ बेरी खाने के बाद भी आंत के बैक्टीरिया इसे बना सकते हैं.

क्या यह स्टडी इंसानों पर हुई थी?

मुख्य नतीजे जानवरों के मॉडल से आए हैं. इसके अलावा लैब में बनाए गए इंसानी दिल के ऊतक पर भी जांच हुई. लेकिन मरीज़ों पर ट्रायल अभी नहीं हुआ है.

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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