छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय दर की तुलना में आधी है। इसके पीछे हम करीब 16 महीने के कोरोना संक्रमण काल के दौरान राज्य सरकार के बेहतर प्रबंधन को मुख्य आधार मान सकते है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआई) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी की दर 3.8 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 7.6 प्रतिशत है। इसका श्रेय निश्चित ही भूपेश सरकार की दूरदर्शी सोच और कुशल प्रबंधन को जाता है।
छत्तीसगढ़ राज्य की स्थिति देश के कई बड़े और विकसित राज्यों से बेहतर है। कोरोना संकट काल के दौरा में भी कारोबार, व्यवसाय और उद्योग धंधे प्रभावित न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने कई प्रभावी कदम भी उठाए। संक्रमण काल में भी लोगों का रोजगार प्रभावित न हो, इसको लेकर भी राज्य सरकार ने रोजगार के नए अवसर दिए। गांवों में भी रोजगार मूलक कार्य नियमित रूप से संचालित किए गए। वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज का संग्रहण, प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग के काम भी लगातार जारी रहे और ये आंकड़े इसी का नतीजा है। साथ ही ये आंकड़े प्रदेश सरकार की नीतियों पर भी मुहर है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली गति
सरकार की नीतियों से लोगों को न सिर्फ रोजगार मिला, बल्कि उनकी आमदनी भी प्रभावित नहीं हुई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश के मुताबिक कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लगातार प्रयास के चलते गांवों की अर्थव्यवस्था को गति मिली। कोरोना संक्रमण काल के दौरान मनरेगा के कामों से गांवों में लोगों का रोजगार भी प्रभावित नहीं हुआ।
कैश फ्लो ने नियंत्रित किया बेरोजगारी दर
ऐसे की उदाहरण और कई योजनाएं हैं जो सरकार की कुशल नीति की गवाही देती हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना, गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना ने भी ग्रामीण अंचल में अर्थव्यवस्था को गति प्रदान की है। इसका परिणाम ये रहा कि मार्केट में पैसे का फ्लो बरकरार रहा। जिसने राज्य में बेरोजगारी दर को नियंत्रित किया। इसी का नतीजा है कि छत्तीसगढ़ दिल्ली, हरयाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और असम जैसे राज्यों को पछाड़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग साख बनाई है।
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