संक्रमण से कैंसर: माइक्रोस्कोप के नीचे बैक्टीरिया और वायरस के कणों का मूल इलस्ट्रेशन

कैंसर का नाम आते ही ज़्यादातर लोग तंबाकू, शराब या खराब खानपान के बारे में सोचते हैं. हालांकि WHO की कैंसर रिसर्च एजेंसी IARC की नई रिपोर्ट एक और बड़ी वजह की ओर इशारा करती है. रिपोर्ट के मुताबिक संक्रमण से कैंसर के मामले दुनिया के कुल नए केस का करीब 12% हैं. अच्छी बात यह है कि इनमें से कई संक्रमण रोके जा सकते हैं.

संक्रमण से कैंसर कितना बड़ा खतरा है

IARC के विश्लेषण के मुताबिक 2024 में दुनिया भर में करीब 23 लाख नए कैंसर केस संक्रमण से जुड़े थे. यह कुल नए मामलों का लगभग 12% है, यानी हर आठ में से एक. सबसे बड़ी वजह पेट का बैक्टीरिया एच पाइलोरी और HPV वायरस हैं. यह स्टडी 28 सितंबर 2026 को द लैंसेट ऑन्कोलॉजी में छपी.

रिपोर्ट के अहम आंकड़े

  • 2024 में करीब 23 लाख नए कैंसर केस संक्रमण से जुड़े.
  • एच पाइलोरी से करीब 7.6 लाख केस, ज़्यादातर पेट का कैंसर.
  • HPV से करीब 7.5 लाख केस, ज़्यादातर सर्वाइकल कैंसर.
  • हेपेटाइटिस बी से 3.6 लाख और हेपेटाइटिस सी से 1.6 लाख लिवर कैंसर.
  • तीन-चौथाई से ज़्यादा केस कम और मध्यम आय वाले देशों में.

कौन से संक्रमण किस कैंसर से जुड़े हैं

सबसे पहले एच पाइलोरी की बात. दरअसल यह पेट में रहने वाला एक बैक्टीरिया है. खास बात यह है कि रिपोर्ट में यह पहली बार HPV से थोड़ा आगे निकला है. इसलिए इसे मुख्य रूप से पेट के कैंसर से जोड़ा जाता है.

दूसरे नंबर पर HPV यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस है. आमतौर पर इससे सबसे ज़्यादा सर्वाइकल यानी बच्चेदानी के मुंह का कैंसर होता है. इसके अलावा यह गुदा, गले और जननांग से जुड़े कुछ कैंसर से भी जुड़ा है.

वहीं हेपेटाइटिस बी और सी वायरस लिवर कैंसर के बड़े कारण हैं. इसके बाद एपस्टीन-बार वायरस यानी EBV आता है. यह वायरस नाक के पीछे के हिस्से, पेट और लिम्फोमा जैसे कैंसर से जुड़ा है. कुल मिलाकर स्टडी में 12 संक्रामक एजेंट शामिल किए गए.

भारत के लिए यह रिपोर्ट क्यों अहम है

फिलहाल रिपोर्ट में भारत के अलग आंकड़े नहीं दिए गए हैं. हालांकि सर्वाइकल कैंसर भारत में भी बड़ी चुनौती है. केंद्र सरकार के मुताबिक देश में हर साल इसके 1.2 लाख से ज़्यादा नए केस आते हैं. साथ ही करीब 80 हज़ार महिलाओं की इससे मौत होती है.

इसी वजह से भारत ने 28 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय HPV टीकाकरण अभियान शुरू किया. अब इसमें 14 साल की लड़कियों को सरकारी केंद्रों पर मुफ्त एक डोज़ दी जा रही है. सरकारी प्रसारक आकाशवाणी के मुताबिक 11 सितंबर तक 80 लाख से ज़्यादा टीके लग चुके थे.

संक्रमण से कैंसर का खतरा कैसे घटाएं

IARC के मुताबिक संक्रमण से कैंसर के बड़े हिस्से को रोका जा सकता है. अच्छी बात यह है कि इसके लिए पहले से मौजूद तरीके काफी असरदार हैं. यानी नई दवा या नई तकनीक का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है.

  • HPV टीका: पात्र बेटियों का टीकाकरण U-WIN पोर्टल पर रजिस्टर करके कराएं.
  • हेपेटाइटिस बी टीका: यह भारत के सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में जन्म के समय से शामिल है.
  • जांच और इलाज: एच पाइलोरी, हेपेटाइटिस बी-सी और HIV की समय पर जांच और इलाज.
  • सुरक्षित इंजेक्शन और सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाएं.
  • महिलाएं डॉक्टर से सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग के बारे में सलाह लें.

ध्यान रहे, हर संक्रमण का नतीजा कैंसर नहीं होता. दरअसल ज़्यादातर लोगों में ये संक्रमण कैंसर तक नहीं पहुंचते. फिर भी लंबे समय तक बना रहने वाला संक्रमण खतरा बढ़ाता है.

रिसर्चर क्या कहते हैं

सबसे पहले मुख्य लेखिका की बात. IARC की डॉ. हैरियट रमगे इस स्टडी की प्रमुख लेखिका हैं. उनका कहना है कि ये नतीजे बताते हैं कि संक्रमण पर काबू पाकर कैंसर का बोझ काफी कम किया जा सकता है. उनके मुताबिक टीकाकरण और जांच में प्रगति के बावजूद इसका सबसे ज़्यादा बोझ गरीब और मध्यम आय वाले देशों पर है.

वहीं सीनियर लेखक डॉ. गैरी क्लिफर्ड ने ऐसे संक्रमणों पर ध्यान देने की बात कही जिनका अभी कोई टीका नहीं है. यानी EBV जैसे वायरस पर आगे ज़्यादा रिसर्च और निवेश की ज़रूरत है.

क्या पहले से बढ़ा है खतरा

IARC के 2018 के पिछले अनुमान में संक्रमण से जुड़े केस करीब 22 लाख यानी 13% थे. हालांकि नई स्टडी में ज़्यादा संक्रमण और नए कैंसर शामिल किए गए हैं. इसलिए दोनों आंकड़ों की सीधी तुलना ठीक नहीं है. ऐसे में 13% से 12% होने को खतरा घटना मान लेना भी गलत होगा.

संक्रमण से कैंसर पर आम सवाल

क्या एच पाइलोरी होने का मतलब पेट का कैंसर है?

नहीं. दरअसल एच पाइलोरी बहुत आम बैक्टीरिया है. फिर भी इससे संक्रमित ज़्यादातर लोगों को कैंसर नहीं होता. पेट की लगातार तकलीफ हो तो डॉक्टर से जांच के बारे में पूछें.

HPV टीका किस उम्र में लगता है?

राष्ट्रीय अभियान में फिलहाल 14 साल की लड़कियों को एक डोज़ दी जा रही है. दूसरी उम्र के लिए डॉक्टर से सलाह लें.

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

यह भी पढ़े:

काली खेती रिलीज़ डेट: 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में आएगी जैकी श्रॉफ-शरद केलकर की हॉरर फिल्म