एंटीबायोटिक और चीनी: दवा की गोलियों के पास मिठाई की प्लेट और आंत के बैक्टीरिया का सरल इलस्ट्रेशन

त्योहारों के मौसम में बुखार या इंफेक्शन हो जाए, तब भी मिठाई का डिब्बा पास ही रहता है. अब एक नई रिसर्च ने एंटीबायोटिक और चीनी के रिश्ते पर ध्यान खींचा है. इसके मुताबिक दवा के दौरान ज़्यादा मीठा खाने वालों में आंत के अच्छे बैक्टीरिया की विविधता कम मिली. हालांकि यह स्टडी गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों पर हुई है, आम लोगों पर नहीं.

एंटीबायोटिक और चीनी पर नई स्टडी ने क्या पाया

यह रिसर्च 30 सितंबर 2026 को जर्नल नेचर में छपी. ब्लड कैंसर के 173 भर्ती मरीज़ों के खाने का हिसाब रखा गया. एंटीबायोटिक के दौरान जिन्होंने ज़्यादा मीठी चीज़ें खाईं, उनकी आंत में बैक्टीरिया की किस्में घटीं. साथ ही एंटरोकोकस नाम का बैक्टीरिया बढ़ा. फिलहाल वैज्ञानिक सबको चीनी छोड़ने की सलाह नहीं दे रहे.

स्टडी के आंकड़े एक नज़र में

  • 173 मरीज़ों के 9,419 बार के खाने और 40,000 से ज़्यादा फूड आइटम दर्ज हुए.
  • 158 मरीज़ों के 1,000 से ज़्यादा मल (स्टूल) सैंपल जांचे गए.
  • मीठी चीज़ों के हर अतिरिक्त 100 ग्राम पर आंत के बैक्टीरिया की विविधता करीब 24% घटी.
  • चूहों पर प्रयोग में सिर्फ चीनी से नहीं, बल्कि चीनी और एंटीबायोटिक साथ होने पर एंटरोकोकस बढ़ा.

किन मरीज़ों पर हुई यह रिसर्च

दरअसल यह स्टडी अमेरिका के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर (MSK) में हुई. इसमें ब्लड कैंसर के वे मरीज़ थे, जो स्टेम सेल या बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए भर्ती थे. ऐसे मरीज़ों को कीमोथेरेपी मिलती है और इंफेक्शन से बचाने के लिए कई एंटीबायोटिक भी.

MSK के मुताबिक हर मरीज़ को कम से कम एक एंटीबायोटिक दी गई. वहीं करीब 80% मरीज़ों को बाद में ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक भी मिली. यानी ऐसी दवा जो कई तरह के बैक्टीरिया पर एक साथ असर करती है.

मरीज़ अस्पताल के मेन्यू से खाना मंगाते थे. इसके बाद वे फॉर्म पर लिखते थे कि असल में कितना खाया. इसलिए शोधकर्ताओं के पास खाने का बहुत बारीक रिकॉर्ड था.

आंत के बैक्टीरिया में क्या बदलाव दिखा

हर स्टूल सैंपल के लिए टीम ने पिछले दो दिन का खाना और दवाएं देखीं. नेचर में छपे पेपर के मुताबिक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक के बाद मीठी चीज़ों के हर अतिरिक्त 100 ग्राम पर विविधता करीब 24% कम हुई.

MSK का कहना है कि 100 ग्राम चीनी मोटे तौर पर सोडा के दो कैन जितनी होती है. साथ ही टेबल शुगर (सुक्रोज़) और फ्रूक्टोज़ वाले खाने से एंटरोकोकस ज़्यादा जुड़ा मिला. बीमारी की गंभीरता और इलाज की तीव्रता का हिसाब लगाने के बाद भी यह जुड़ाव बना रहा.

दिलचस्प बात यह है कि बीमार मरीज़ों को अक्सर दिए जाने वाले न्यूट्रिशनल शेक और स्मूदी सबसे ज़्यादा नुकसान से जुड़े दिखे. MSK के मुताबिक इसकी वजह इनमें मौजूद चीनी हो सकती है.

एंटरोकोकस बढ़ना क्यों चिंता की बात है

एंटरोकोकस आंत में रहने वाला एक बैक्टीरिया है. लेकिन जब यह बाकी बैक्टीरिया पर हावी हो जाए, तो दिक्कत बढ़ती है. MSK की पिछली रिसर्च में इसके हावी होने को खून के इंफेक्शन के ज़्यादा खतरे से जोड़ा गया था.

वहीं चूहों पर हुए प्रयोग ने इस संकेत को और साफ किया. स्वस्थ चूहों को एंटीबायोटिक के साथ ज़्यादा सुक्रोज़ वाला खाना दिया गया, तो एंटरोकोकस तेज़ी से बढ़ा. जबकि बिना एंटीबायोटिक सिर्फ ज़्यादा चीनी पाने वाले चूहों में ऐसा नहीं हुआ.

एंटीबायोटिक और चीनी: अभी आपके लिए इसका क्या मतलब

सबसे पहले, यह इंसानों पर ऑब्ज़र्वेशनल स्टडी है. यानी इसमें जुड़ाव दिखा है, पक्का कारण साबित नहीं हुआ. इसके अलावा मरीज़ बहुत गंभीर हालत में थे और कीमो-रेडिएशन भी ले रहे थे.

MSK के डॉक्टर जोनाथन पेलेड ने साफ कहा है कि अभी ऐसे सबूत नहीं हैं कि एंटीबायोटिक लेने वाले हर व्यक्ति को चीनी से बचना चाहिए. उनके मुताबिक इसे क्लिनिकल ट्रायल में परखना आसान होना चाहिए. इसलिए एंटीबायोटिक और चीनी पर अंतिम राय ट्रायल के बाद ही बनेगी.

दवा चल रही हो तो इन बातों का रखें ध्यान

एंटीबायोटिक और चीनी पर रिसर्च जारी है, पर दवा के नियम पहले जैसे ही हैं. ये सलाह इस स्टडी से नहीं, बल्कि सामान्य नियमों से जुड़ी हैं.

  • एंटीबायोटिक डॉक्टर के निर्देश या पैकेट पर लिखी जानकारी के मुताबिक ही लें.
  • दवा खुद से बीच में बंद न करें और खुराक न बदलें.
  • NHS के मुताबिक किसी दूसरे की एंटीबायोटिक “उधार” लेकर न खाएं.
  • सर्दी-ज़ुकाम और फ्लू वायरस से होते हैं, इनमें एंटीबायोटिक काम नहीं करती.
  • दस्त या पेट की परेशानी हो, तो डॉक्टर को बताएं.

अगर आप इलाज के दौरान मिठाई कम करना चाहते हैं, तो पहले डॉक्टर से पूछ लें. खासकर डायबिटीज़, कैंसर या कमज़ोरी वाले मरीज़ों की डाइट डॉक्टर ही तय करें.

एंटीबायोटिक और मीठे से जुड़े आम सवाल

क्या एंटीबायोटिक लेते समय मिठाई बिल्कुल बंद कर दें?

फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक सलाह नहीं है. यह स्टडी सिर्फ संकेत देती है. डाइट में बदलाव से पहले अपने डॉक्टर से बात करें.

क्या यह नतीजा आम इंफेक्शन वाले लोगों पर भी लागू होता है?

अभी यह तय नहीं है. MSK के मुताबिक आगे की रिसर्च में देखा जाएगा कि कान या पेशाब के इंफेक्शन जैसी आम बीमारियों में भी ऐसा होता है या नहीं.

क्या प्रोबायोटिक लेने से फायदा होगा?

डॉक्टर पेलेड के मुताबिक प्रोबायोटिक से मदद के पक्के सबूत अभी मज़बूत नहीं हैं. इसलिए कोई सप्लीमेंट खुद से शुरू न करें.

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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