छत्तीसगढ़ समाचार, विजय शर्मा, नक्सल प्रकरण,

छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से जुड़े मामलों और पुनर्वास की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी है। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। यह समीक्षा बैठक 8 अक्टूबर को नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में आयोजित हुई।

बैठक में पात्र मामलों की वापसी, आत्मसमर्पित व्यक्तियों का पुनर्वास और प्रभावित परिवारों को सहायता देने की समीक्षा की गई। इसके अलावा, शहीद जवानों और मृत नागरिकों की स्मृति में स्मारक बनाने पर भी चर्चा हुई।

15 दिनों में जिला स्तरीय समितियों की बैठक

विजय शर्मा ने सभी जिलों से प्राप्त आवेदनों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से प्रत्येक मामले की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। साथ ही, पात्र मामलों की वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए।

गंभीर अपराध, जनहानि और यूएपीए से जुड़े मामलों को इससे अलग रखा गया है। अन्य पात्र मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों को अगले 15 दिनों में जिला स्तरीय समितियों की बैठक करनी होगी। वहीं, राज्य स्तरीय समिति की बैठक 5 नवंबर तक आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

दूसरे राज्यों से लौटे लगभग 900 पुनर्वासित

बैठक में दूसरे राज्यों में आत्मसमर्पण करने वाले छत्तीसगढ़ के निवासियों की वापसी पर चर्चा हुई। अब तक लगभग 900 पुनर्वासितों के राज्य लौटने की जानकारी दी गई।

शर्मा ने पुनर्वास केंद्रों में उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण देने को कहा। इसका उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है।

उन्होंने पुनर्वासितों को मोबाइल फोन और प्रशिक्षण किट देने के निर्देश भी दिए। साथ ही, पहचान पत्र, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड बनवाने पर जोर दिया।

नक्सल पुनर्वास नीति के तहत मिलें सभी सुविधाएं

सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत पात्र व्यक्तियों को विभिन्न सुविधाएं देने की समीक्षा हुई। इसमें भूमि आवंटन, आवास, रोजगार और आर्थिक सहायता शामिल हैं।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कोई भी पात्र व्यक्ति निर्धारित लाभों से वंचित न रहे। लंबित प्रोत्साहन राशि और पुनर्विचार से जुड़े मामलों का भी समय पर निराकरण करने को कहा गया।

पुनर्वासितों को आजीविका प्रशिक्षण देने और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। इससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में मदद मिलेगी।

शहीद जवानों और प्रभावित परिवारों को सहायता

बैठक में वर्ष 2001 से अब तक नक्सल घटनाओं में शहीद जवानों के परिजनों को मिलने वाले लाभों की समीक्षा हुई। इसमें अनुकंपा नियुक्ति और अन्य निर्धारित सहायता शामिल हैं।

अधिकारियों को लंबित मामलों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया। नक्सल हिंसा में मृत नागरिकों के आश्रित परिवारों की सहायता पर भी चर्चा हुई।

घायल जवानों और नागरिकों के उपचार तथा अन्य सुविधाओं की स्थिति भी समीक्षा का हिस्सा रही। निर्देश दिए गए कि सभी पात्र परिवारों को निर्धारित लाभ मिलें।

शहीदों की स्मृति में बनेंगे जनोपयोगी स्मारक

नक्सल घटनाओं में शहीद जवानों और मृत नागरिकों की स्मृति में स्मारक बनाए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री ने इन्हें जनोपयोगी स्वरूप देने पर जोर दिया।

बड़े घटनास्थलों पर स्मारकों के साथ यात्री प्रतीक्षालय जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। वहां संबंधित घटनाओं और शहीदों की जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी।

इसके अलावा, पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, मार्ग, चौक और स्कूल मैदानों के नाम शहीदों के नाम पर रखने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों को अगले महीने तक आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए।

बस्तर के गांवों और किसानों के लिए भी निर्देश

बैठक में बस्तर के उन गांवों की पहचान करने पर चर्चा हुई, जहां खेती में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं हुआ है। ऐसे गांवों के कृषि उत्पादों को उचित मूल्य दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने को कहा गया।

इस पहल में महिला स्वसहायता समूहों को जोड़ने पर भी जोर दिया गया। इससे स्थानीय उत्पादों से जुड़ी गतिविधियों और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।

इलवद पंचायत के लंबित विकास कार्यों की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों को ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार काम स्वीकृत करने के निर्देश दिए गए।

मां दंतेश्वरी के श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर जोर

नवरात्रि के दौरान मां दंतेश्वरी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सुरक्षा और जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शामिल हुए। कई जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक वर्चुअल माध्यम से जुड़े।





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