UPI मर्चेंट फीस

डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों के लिए राहत की खबर सामने आई है। UPI भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क को दिवाली तक टाल दिया गया है। यह व्यवस्था पहले 15 अक्टूबर से लागू होने वाली थी। नए नियमों के तहत, ₹2,000 से अधिक के कुछ भुगतानों पर 0.4% शुल्क लगाने का प्रस्ताव था।

नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने त्योहारी सीजन को देखते हुए यह फैसला लिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुल्क दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जा सकता है। हालांकि, इसकी नई तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।

UPI मर्चेंट फीस के नए नियम क्या हैं?

प्रस्तावित व्यवस्था में व्यापारियों की मासिक UPI बिक्री के आधार पर शुल्क तय किया गया है। इसका असर मुख्य रूप से उन कारोबारियों पर पड़ सकता है, जो बड़ी मात्रा में डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं।

  • बड़े व्यापारियों पर शुल्क: महीने में ₹1 लाख से अधिक UPI कलेक्शन करने वाले व्यापारियों से ₹2,000 से अधिक के पात्र भुगतान पर 0.4% MDR प्रस्तावित है। इस शुल्क पर 18% GST भी लगेगा।
  • छोटे दुकानदारों को राहत: महीने में ₹1 लाख तक UPI कलेक्शन करने वाले व्यापारियों को प्रस्तावित नियमों के तहत शुल्क से छूट मिलेगी।
  • छोटे भुगतान पर कोई MDR नहीं: बड़े व्यापारियों को भी ₹2,000 तक के पात्र लेनदेन पर यह शुल्क नहीं देना होगा।
  • व्यापारी की श्रेणी में बदलाव: लगातार तीन महीने तक ₹1 लाख से अधिक UPI कलेक्शन होने पर छोटे व्यापारी को बड़े मर्चेंट की श्रेणी में रखा जा सकता है।
  • अधिकतम शुल्क की सीमा: ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर अधिकतम ₹300 MDR और अतिरिक्त GST का प्रावधान बताया गया है।

किन क्षेत्रों में लगेगी फ्लैट फीस?

कुछ खास क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था प्रस्तावित है। इसमें पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल भुगतान, टेलीकॉम, बीमा और शिक्षा से जुड़े व्यापारी शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के पात्र भुगतान पर 0.4% के बजाय ₹5 की फ्लैट फीस बताई गई है। हालांकि, संबंधित क्षेत्र और लेनदेन पर लागू शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

₹2,000 की सीमा प्रत्येक भुगतान पर लागू होगी। इसका निर्धारण पूरे दिन की कुल बिक्री से नहीं किया जाएगा। इसलिए व्यापारियों को हर लेनदेन के नियम समझने होंगे।

MDR शुल्क क्या होता है?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह शुल्क है, जो व्यापारी भुगतान स्वीकार करने की सुविधा के बदले संबंधित वित्तीय संस्थान या भुगतान सेवा प्रदाता को देता है। यह डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़ी सेवाओं की लागत में योगदान करता है।

प्रस्तावित व्यवस्था में शुल्क व्यापारी पर लागू होगा, ग्राहक पर सीधे नहीं। हालांकि, अंतिम नियमों की पुष्टि के लिए NPCI और संबंधित बैंकों के आधिकारिक निर्देश देखना जरूरी है।

कार्ड भुगतान के मुकाबले UPI कितना सस्ता है?

क्रेडिट कार्ड पर MDR शुल्क आमतौर पर 1.5% से 2.5% तक हो सकता है। डेबिट कार्ड पर भी लागू दरों के अनुसार शुल्क लिया जा सकता है। प्रस्तावित UPI दर 0.4% होने के कारण तुलनात्मक रूप से कम दिखाई देती है।

फिर भी, वास्तविक लागत व्यापारी की श्रेणी और लागू नियमों पर निर्भर करेगी। दिवाली के बाद जारी होने वाले आधिकारिक अपडेट से नई व्यवस्था की तारीख और शर्तें स्पष्ट हो सकती हैं।

व्यापारियों के लिए जरूरी बात: फिलहाल प्रस्तावित शुल्क की नई लागू तारीख की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी अंतिम निर्णय से पहले आधिकारिक दिशानिर्देशों की जांच करें।

यह भी पढ़े:  छत्तीसगढ़ में महिला विकास को मिलेगी नई दिशा- मुख्यमंत्री साय