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चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के निर्देश दिए हैं। एसएसआर प्रक्रिया के जरिए पात्र मतदाता अपना नाम जुड़वा सकेंगे। इसके अलावा, मौजूदा विवरण में गलतियों को सुधारने का अवसर भी मिलेगा। इस अभियान के लिए पात्रता की तारीख 1 जनवरी 2027 रखी गई है। प्रारूप मतदाता सूची 12 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 11 दिसंबर निर्धारित है। अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को जारी होगी।

एसएसआर क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ती है?

एसएसआर का पूरा नाम स्पेशल समरी रिवीजन है। हिंदी में इसे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कहा जाता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसकी गलतियां सुधारना है। पात्र नागरिक अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। गलत पते या अन्य विवरणों में सुधार भी कराया जा सकता है। नियमानुसार, अपात्र प्रविष्टियों पर भी कार्रवाई की जाती है।

इस दौरान निर्वाचन अधिकारी मतदाता सूची की जांच करते हैं। बूथ स्तर अधिकारी यानी बीएलओ सत्यापन में अहम भूमिका निभाते हैं। मतदान केंद्रों के युक्तिकरण और जरूरी प्रशासनिक तैयारियों पर भी काम होता है।

किन राज्यों में होगा मतदाता सूची का पुनरीक्षण?

इस चरण में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान शामिल हैं। उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, गुजरात और पश्चिम बंगाल में भी यह प्रक्रिया होगी। इसके अलावा केरल, असम, मणिपुर और तमिलनाडु को भी सूची में रखा गया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप तथा पुडुचेरी भी शामिल हैं।

जिन राज्यों में एसआईआर जारी है या हाल में पूरा हुआ है, उनके लिए कार्यक्रम अलग से घोषित किया जाएगा। इसलिए नागरिकों को अपने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अधिसूचनाएं देखनी चाहिए।

एसएसआर प्रक्रिया की महत्वपूर्ण तारीखें

चुनाव आयोग के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, पुनरीक्षण कई चरणों में पूरा होगा। मतदाताओं को प्रारूप सूची जारी होने के बाद अपने विवरण जांचने चाहिए।

  • 2 नवंबर 2026: मतदान केंद्रों के युक्तिकरण की प्रक्रिया पूरी करने की तारीख।
  • 12 नवंबर 2026: प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन।
  • 11 दिसंबर 2026: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख।
  • 28 दिसंबर 2026: दावों और आपत्तियों पर कार्रवाई पूरी करने की तारीख।
  • 4 जनवरी 2027: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन। India News – The Indian Express+1

एसएसआर और एसआईआर में क्या अंतर है?

एसएसआर और एसआईआर दोनों मतदाता सूची की शुद्धता से जुड़े हैं। हालांकि, इनके दायरे और तरीकों में अंतर है। एसएसआर में मौजूदा मतदाता सूची को संशोधित और अपडेट किया जाता है। इसके तहत नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं। पहले से दर्ज जानकारी में सुधार भी किया जा सकता है।

वहीं, एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाताओं के विवरण का विस्तृत सत्यापन किया जाता है। इसमें गणना और जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शामिल हो सकती है। आसान शब्दों में, एसएसआर मौजूदा सूची को अपडेट करता है। एसआईआर में मतदाता विवरण की अधिक गहन जांच की जाती है।

नाम जुड़वाने और जानकारी सुधारने के लिए कौन-से फॉर्म भरें?

आवेदन करने से पहले नागरिकों को अपनी जरूरत के अनुसार सही फॉर्म चुनना चाहिए। चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर संबंधित सेवाएं उपलब्ध हैं।

  • फॉर्म 6: मतदाता सूची में नया नाम दर्ज कराने के लिए।
  • फॉर्म 7: किसी नाम को शामिल करने पर आपत्ति या नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए।
  • फॉर्म 8: पते में बदलाव, विवरण में सुधार या ईपीआईसी से जुड़ी निर्धारित सेवाओं के लिए। Voter Information System+1

मतदाता सूची में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी?

पुनरीक्षण के दौरान निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि पात्र नागरिकों के आवेदन नियमों के अनुसार जांचे जाएं। राजनीतिक दल अपने बूथ स्तर एजेंट नियुक्त कर सकते हैं। ये एजेंट सूची में संभावित गलतियों की जानकारी अधिकारियों को दे सकते हैं।

प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। नागरिक भी ऑनलाइन अपना नाम खोज सकते हैं। आवेदन की स्थिति जानने के लिए चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर जाएं।

मतदाताओं को अभी क्या करना चाहिए?

नागरिकों को अपने नाम, पते और अन्य विवरणों की जांच करनी चाहिए। पहली बार वोट देने के पात्र युवा भी पंजीकरण की तैयारी कर सकते हैं। सूची में नाम नहीं होने पर उचित आवेदन करना जरूरी है।

एसएसआर प्रक्रिया के दौरान निर्धारित समय सीमा का पालन करना महत्वपूर्ण रहेगा। किसी भी आवेदन से पहले आधिकारिक दिशा-निर्देश पढ़ें। तारीखों में बदलाव होने पर चुनाव आयोग की नवीनतम सूचना को प्राथमिकता दें।






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