छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 19 अक्टूबर को रायपुर के विभिन्न नवरात्रि आयोजनों में शामिल हुए। उन्होंने दुर्गा पूजा पंडालों में पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने संस्कृति, सामाजिक एकता और मातृशक्ति के सम्मान को पर्व का अहम संदेश बताया।
मुख्यमंत्री माना बाजार की सार्वजनिक दुर्गा पूजा समितियों के पंडालों में पहुंचे। इसके बाद उन्होंने कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इनमें हुकुम ललित महल का रास गरबा, रामबाग का आयोजन और पचपेड़ी नाका स्थित राम मंगलम लॉन का नवरात्रि उत्सव शामिल रहे। वे शंकर नगर के बीटीआई मैदान में आयोजित संकल्प गरबा में भी पहुंचे।
गरबा महोत्सव से मिलती है सांस्कृतिक एकता को मजबूती
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि मां दुर्गा की आराधना और सांस्कृतिक परंपराओं का पर्व है। गरबा भक्ति और श्रद्धा की सुंदर अभिव्यक्ति है। ऐसे आयोजन अलग-अलग समुदायों को एक साथ जोड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की विविधता में एकता उसकी खास पहचान है। त्योहार आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करते हैं। पारंपरिक आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ती है।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रमों में शामिल माताओं, बहनों और बेटियों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान और उनकी सामाजिक भागीदारी जरूरी है। महिलाओं की प्रगति से परिवार और समाज दोनों को मजबूती मिलती है।
महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए संचालित योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की लगभग 68 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता मिल रही है।
यह राशि महिलाओं को घरेलू जरूरतों और परिवार के खर्चों में मदद देती है। इससे वे अपनी आवश्यकताओं से जुड़े फैसले लेने में भी सहयोग प्राप्त कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आजीविका गतिविधियों और उद्यमिता में भागीदारी निभा रही हैं। सरकार महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने पर काम कर रही है।
छत्तीसगढ़ की धार्मिक विरासत को सहेजने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में देवी आराधना की समृद्ध परंपरा रही है। मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी के मंदिर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
नवरात्रि में इन मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं का विकास जरूरी है। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्थाएं मिल सकती हैं और धार्मिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
उन्होंने विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की प्रतिबद्धता दोहराई। राज्य सरकार धार्मिक स्थलों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयास कर रही है।
विकास और परंपराओं को साथ लेकर आगे बढ़ेगा छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने ‘विकास भी, विरासत भी’ की भावना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास के साथ संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखना भी आवश्यक है।
कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने भी प्रदेशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बस्तर में शांति, विकास और जनजातीय संस्कृति की पहचान से जुड़े विषयों पर बात की।
कार्यक्रमों में प्रतिभागियों ने पारंपरिक परिधानों में गरबा और डांडिया प्रस्तुतियां दीं। भक्ति गीतों और पारंपरिक संगीत के बीच लोगों ने उत्सव मनाया। मुख्यमंत्री ने आयोजन समितियों के प्रयासों की सराहना की और प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य, शांति तथा खुशहाली की कामना की।
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