केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़ी शुल्क व्यवस्था में बदलाव किया है। नए आदेश के तहत पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके विपरीत, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर शुल्क बढ़ाया गया है।
इस फैसले के बाद पेट्रोल निर्यात पर शुल्क शून्य हो गया है, जबकि डीजल पर प्रति लीटर ₹11.50 और एटीएफ पर ₹11 की दर लागू की गई है। संशोधित दरें वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार प्रभावी हुई हैं।
पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के लिए नई शुल्क दरें
सरकार ने तीनों ईंधनों पर अलग-अलग दरें निर्धारित की हैं। नए बदलाव के बाद निर्यात शुल्क की स्थिति इस प्रकार है:
- पेट्रोल: ₹2.50 प्रति लीटर से घटाकर शून्य।
- डीजल: ₹8.50 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹11.50।
- एटीएफ: ₹10.50 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹11।
इस बदलाव में पेट्रोल निर्यातकों को शुल्क से राहत मिली है। वहीं डीजल और विमानन ईंधन का निर्यात करने वाली कंपनियों पर पहले के मुकाबले अधिक शुल्क लागू होगा।
निर्यात शुल्क में बदलाव के पीछे क्या है वजह?
भारत सरकार ने मार्च 2026 में पश्चिम एशिया संकट के बीच पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विशेष शुल्क लागू किया था। इसका उद्देश्य देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर कीमत मिलने पर रिफाइनरियों को बड़े पैमाने पर निर्यात करने से हतोत्साहित करना था।
इन दरों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क में बदलाव भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और तैयार ईंधन की कीमतों को ध्यान में रखकर दरें संशोधित करती है।
क्या घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम बदलेंगे?
निर्यात शुल्क में किए गए इस बदलाव को घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सीधा बदलाव नहीं माना जाना चाहिए। यह शुल्क विदेश भेजे जाने वाले ईंधन पर लागू होता है। इसलिए पेट्रोल पंप पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों पर इसका स्वतः असर नहीं पड़ता।
वित्त मंत्रालय की पिछली अधिसूचनाओं में भी निर्यात शुल्क और घरेलू खपत के लिए लागू उत्पाद शुल्क को अलग-अलग व्यवस्था बताया गया है। रिफाइनरियों और निर्यात कारोबार पर क्या होगा असर?
पेट्रोल पर निर्यात शुल्क समाप्त होने से इस उत्पाद के निर्यातकों को शुल्क के मोर्चे पर राहत मिलेगी। दूसरी ओर, डीजल और एटीएफ पर बढ़ी हुई दरों से इन उत्पादों को विदेश भेजने की लागत बढ़ेगी। इसका असर रिफाइनरियों के निर्यात फैसलों और कारोबार की गणना पर पड़ सकता है।
भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात और घरेलू आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना ऊर्जा नीति का अहम हिस्सा है। ऐसे में पेट्रोलियम निर्यात शुल्क की दरों में बदलाव को वैश्विक कीमतों और देश की जरूरतों के अनुरूप की जा रही समीक्षा के तौर पर देखा जा सकता है।
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