प्रवासी छत्तीसगढ़िया गणेश कुमार कर

छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ाव और अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का जज्बा देश की सीमाओं से परे भी कायम रह सकता है। इसका उदाहरण दंतेवाड़ा जिले के गणेश कुमार कर हैं, जिन्होंने अमेरिका में रहते हुए भी अपनी मातृभूमि की संस्कृति, भाषा और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का प्रयास किया है। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें आत्मीय पत्र भेजकर शुभकामनाएं दीं और उनके सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान की सराहना की।

दंतेवाड़ा से अमेरिका तक का सफर, अपनी जड़ों से कायम रखा जुड़ाव

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने पत्र में गणेश कुमार कर की यात्रा को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि विदेश में रहते हुए भी अपनी जन्मभूमि, भाषा और परंपराओं से जुड़े रहना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के साथ अपनी जड़ों और मातृभूमि को याद रखना प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय है। प्रवासी छत्तीसगढ़िया गणेश कुमार कर का यह प्रयास बताता है कि भौगोलिक दूरी अपनी सांस्कृतिक पहचान को कमजोर नहीं कर सकती।

NACHA और स्वदेशी मेले से विदेशों में पहुंच रही छत्तीसगढ़ की संस्कृति

नॉर्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन (NACHA) के माध्यम से गणेश कुमार कर विदेशों में निवासरत छत्तीसगढ़ियों को एकजुट करने का कार्य कर रहे हैं। इस संगठन के जरिए प्रवासी समुदाय को अपनी मातृभाषा में संवाद करने, पारंपरिक त्योहार मनाने और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेने का अवसर मिलता है।

मुख्यमंत्री ने उनके द्वारा आयोजित ‘स्वदेशी मेला’ की पहल की भी सराहना की। इस आयोजन के माध्यम से भारतीय उत्पादों, हस्तशिल्प, कला और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के विचार को आगे बढ़ाने से भी जुड़ी है।

‘उड़ान’ पहल से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में मिल रही मदद

सांस्कृतिक गतिविधियों के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में भी गणेश कुमार कर का योगदान उल्लेखनीय है। मुख्यमंत्री ने उनकी ‘उड़ान’ पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा और छात्रवृत्ति के लिए किए जा रहे प्रयास सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को दर्शाते हैं।

इस पहल के माध्यम से जरूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी उपलब्धियों के साथ दूसरों के भविष्य को संवारने की सोच समाज के प्रति समर्पण का उदाहरण है।

विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लक्ष्य में प्रवासियों की भागीदारी अहम

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने पत्र में विकसित भारत 2047 और विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के संकल्प का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले छत्तीसगढ़ियों का अनुभव, ज्ञान और कौशल प्रदेश के विकास में उपयोगी साबित हो सकता है।

प्रवासी छत्तीसगढ़िया गणेश कुमार कर जैसे लोग विदेशों में रहते हुए भी अपनी जन्मभूमि के विकास और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उनसे विदेशों में बसे सभी छत्तीसगढ़ियों तक राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं पहुंचाने का आग्रह भी किया।

मुख्यमंत्री का पत्र पाकर गणेश कुमार कर ने जताया आभार

मुख्यमंत्री का स्नेह भरा पत्र प्राप्त होने पर गणेश कुमार कर ने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश साझा कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने वीडियो में मुख्यमंत्री द्वारा भेजे गए पत्र को भी प्रदर्शित किया।

दंतेवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल वनांचल जिले से निकलकर अमेरिका में अपनी पहचान बनाने के बावजूद उनका अपनी जन्मभूमि से जुड़ाव बना हुआ है। प्रवासी छत्तीसगढ़िया गणेश कुमार कर के सांस्कृतिक आयोजनों, सामाजिक गतिविधियों और शिक्षा संबंधी प्रयासों से विदेशों में छत्तीसगढ़ की पहचान को बढ़ावा मिल रहा है।

मुख्यमंत्री का यह पत्र विदेशों में रह रहे छत्तीसगढ़वासियों के साथ राज्य के आत्मीय संबंधों को भी दर्शाता है। इसका संदेश है कि दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले छत्तीसगढ़िया अपनी मातृभूमि की संस्कृति, गौरव और विकास यात्रा के महत्वपूर्ण सहभागी हैं।

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