सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदेश में हुए कथित एक हजार करोड़ के फर्जी अस्पताल घोटाले मामले में हाईकोर्ट से सुनवाई करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट में पेश स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) में सुनवाई करते हुए इस प्रकरण को वापस छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मामले में याचिकाकर्ताओं, विवेक ढांढ और एमके राउत का पक्ष सुनते हुए फैसला करें।
रायपुर के कुशालपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर ने प्रदेश में प्रशासनिक लगाम संभालने वाले कुछ IAS अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक जनहित याचिका दायर कर रिटायर्ड अफसरों द्वारा बड़ी गड़बड़ी करने का दावा है। बताया गया है कि सूचना के अधिकार के तहत जानकारी हासिल करने पर कई तथ्य सामने आए हैं। जिसमें पता चला है कि नया रायपुर स्थित इस कथित नि:शक्त जन अस्पताल को एक NGO द्वारा चलाया जा रहा है। अस्पताल में करोड़ों की मशीनें खरीदी गईं हैं। रखरखाव में भी करोड़ों का खर्च आना बताया गया। तब ये जानकारी सामने आई कि न कोई अस्पताल है न कोई NGO, सब सिर्फ कागजों में है।
2018 में दायर हुई थी याचिका
साल 2018 में जनहित याचिका पेश की गई थी। मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि ये 1 हजार करोड़ का घोटाला है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने साल 2019 में हुई सुनवाई में घोटाले में शामिल अफसरों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। तब महाधिवक्ता ने शासन का पक्ष प्रस्तुत किया था। उनका कहना था कि CBI की जगह यह मामला राज्य पुलिस को सौंप दिया जाए।
अब हाईकोर्ट के हवाले केस
इस पर सरकार की तरफ से कहा गया कि पुलिस जो जांच करे उसे स्वयं हाईकोर्ट अपनी निगरानी में रखे। दूसरी तरफ रिटायर्ड IAS और प्रदेश के मुख्य सचिव रह चुके विवेक ढांढ समेत एम के राउत ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की थी। इसी पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अब हाईकोर्ट को सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं।
यहां से शुरू घोटाले की कहानी
कुंदन सिंह ठाकुर की ओर से अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया था कि राज्य के 6 आईएएस अफसर, जिसमें आलोक शुक्ला, विवेक ढांड, एमके राउत, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल और पीपी सोती समेत सतीश पांडेय, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी, हरमन खलखो, एमएल पांडेय और पंकज वर्मा शामिल हैं, इन्होंने फर्जी संस्थान स्टेट रिसोर्स सेंटर (SRC) (राज्य स्रोत नि:शक्तजन संस्थान) के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला किया है।
हाईकोर्ट ने दिेए थे एफआईआर के निर्देश
इसी मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CBI से इस पर FIR दर्ज कर जांच करने को कहा था। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अब ये केस फिर से चर्चा में आ गया है। इस पर हाईकोर्ट अब सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करेगा।
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