भारत में शायद ही कोई ऐसा होगा जो अमिताभ बच्चन को नहीं पहचानता । एक्टर अमिताभ बच्चन ने इस तस्वीर को 79 के बाद अगले साल अपने 80वें साल से जोड़ते हुए लिखा है 80 की ओर बढ़ते हुए।

खास अंदाज में अमिताभ ने लिखा कहावत

एक खास अंदाज में अमिताभ ने लिखा है जब साठा ….तब पाठा …जब अस्सी…. तब लस्सी…. इस मुहावरे को समझना भी एक समझ है । इस मशहूर कहावत के माध्यम से अमिताभ ने अपने बुढ़ापे को नकारा है।उम्र के इस पड़ाव में उनकी सक्रियता इस कैप्शन को सही साबित करती है। उनका फैशन सेंस और फिटनेस लेवल इस बात का प्रमाण है कि वह उम्र के साथ और जवां होते जा रहे हैं ।इस पोस्ट पर फैंस ने ढेरों बधाइयां दे रहे हैं।

‘सात हिन्दुस्तानी’ फिल्म से अभिनय की शुरुआत

अमिताभ की सबसे बड़ी खासियत उनकी दमदार अदाकारी और डायलॉग डिलीवरी है। उनकी कई फिल्मों के डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं। ‘सात हिन्दुस्तानी’ फिल्म से अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाले अमिताभ के लिए शुरू-शुरू में निर्देशकों का मानना था कि दुबले-पतले और सामान्य से अधिक लंबे इस शख्स में ऐसा कोई गुण नहीं है, जिसके कारण दर्शक उन्हें पर्दे पर पसंद करेंगे। लेकिन बिग बी ने अभिनय, अनुशासन और कड़ी मेहनत की बदौलत इंडस्ट्री में जो पहचान बनाई, वह हर किसी को नसीब नहीं होती है।

अनगिनत पुरस्कारों से नवाजे जा चुके अमिताभ

वह पिछले पांच दशकों से हिंदी फिल्मों में सक्रिय हैं। उन्होंने 200 से ज्यादा फिल्में की हैं। अपने अभिनय करियर में अनगिनत पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं। उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से लेकर पद्मश्री और पद्मभूषण तक का सर्वोच्च सम्मान मिल चुका है। तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 16 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने वाले अमिताभ बच्चन सिर्फ एक्टर ही नहीं, बल्कि प्लेबैक सिंगर और फिल्म प्रोड्यूसर भी हैं। उन्होंने बड़े पर्दे के साथ ही छोटे पर्दे पर भी अपनी उपस्थिति से दर्शकों के दिलों में राज किया है। फिल्मों में उनके योगदान को देखते हुए साल 2015 में फ्रांस की सरकार ने भी उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान नाइट ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर से सम्मानित किया।

पॉलिटिक्स में भी आजमाया हाथ

फिल्मों के साथ ही राजनीति में भी करियर आजमाने वाले अमिताभ भले ही पॉलिटिक्स में ज्यादा वक्त नहीं रह पाये हों,  लेकिन 8वें लोकसभा चुनाव में अपने गृह क्षेत्र इलाहाबाद की सीट से उन्होंने यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री एचएन बहुगुणा को हराया जरूर था। उनके ऊपर कई किताबें लिखी जा चुकी हैं। जिनमें अमिताभ बच्चन : द लिजेंड 1999 में, टू बी ऑ नॉट टू बी: अमिताभ बच्चन 2004 में लिखी गई थी। एबी: द लिजेंड ( ए फोटोग्राफर्स ट्रिब्यूट) 2006 में लिखी गई है। साल 2007 में लुकिंग फॉर द बिग बी: बॉलीवुड, बच्चन एंड मी 2007 और बच्चनानिया 2009 में प्रकाशित हुई है।