पेट्रोल और डीजल, खाद्य तेल, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में दोगुनी वृद्धि
केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद लोग अच्छे दिन की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन उनकी सरकार में अब हर चीज की कीमत दोगुनी हो गई है। अगर आप फल, सब्जियां या किराने का सामान लेने जाएं तो इसके लिए आपको दोगुनी कीमत देनी पड़ रही है। एक सर्वे के मुताबिक उपभोक्ताओं का विश्वास अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। उपभोक्ता विश्वास सूचकांक सितंबर में 49.9 पर आ गया है। जबकि ये जुलाई में 53.8 पर था। भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अक्टूबर 2020 में अपने साढ़े 6 साल के सबसे ऊंचे स्तर 7.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है। खाद्य मुद्रास्फीति दो अंकों में दर्ज की गई है।
प्रोटीन आधारित सामान जैसे अंडे, मांस व मछली, तेल, सब्जियों और दालों की कीमतों के कारण महंगाई बढ़कर 11.07 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। आलू की कीमतों में पिछले महीने के 102 प्रतिशत के मुकाबले 104.56 प्रतिशत की सबसे तेज वृद्धि हुई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चार प्रमुख कारणों के कारण मुद्रास्फीति बढ़ रही है। इनमें पेट्रोल और डीजल पर सरकार ने टैक्स बढ़ा दिया है। कई कंपनियों ने निजी देखभाल के उत्पादों जैसे कॉस्मैटिक व साफ-सफाई का सामान और मनोरंजन की श्रेणी में आने वाले सामानों की कीमत भी बढ़ा दी है, इस सबके कारण महंगाई में तेजी आई है।
बस करो मोदी सरकार
इसके अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में अनियमित बारिश के कारण प्याज की फसल में भी देरी हुई है। जिससे प्याज के दाम बढ़े हैं. मूंगफली, सरसों, वनस्पती, सोयाबीन, सूरजमुखी और ताड़ जैसे खाद्य तेल भी 30 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं और ये भी चिंता का एक बड़ा कारण है। भारत में 70 प्रतिशत खाद्य तेल अन्य देशों से आयात किया जाता है। जो लोग अंडे खाते हैं वो सब्जियों के दाम बढ़ने से अब अंडे का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं, इससे भी अंडे की कीमत बढ़ी है जबकि अंडे के उत्पादन पर महामारी का बुरा असर भी रहा है। ऊपर से सरकारी खर्च भी महंगाई को और बढ़ा रहा है। सरकार 30 लाख करोड़ रुपये खर्च करने वाली है जो कि जीडीपी का 15 प्रतिशत है। जनता के पहुंच से बाहर होने के कारण अब उनकी एक ही मांग रह गई है, बहुत हो गई महंगाई की मार बस करो मोदी सरकार।
महंगाई के जाल में फंसी जनता
केंद्र सरकार ने आम जनता को दीवाली मनाने लायक नहीं छोड़ा है। इस दीवाली में उत्साह केवल कुछ पूंजीपतियों और भाजपा नेताओं के घर पर ही दिख रहा है। पहले खाद्य तेलों के दाम दुगुने करवा दिए, डीजल के दाम बढ़ने से माल परिवहन बढ़ गया, अब कोयला संकट के कारण बिजली, लोहा, सीमेंट, गैसे अन्य निर्माण सामाग्रियों के दाम आदमी के पहुंच से दूर हो गए हैं। कपड़ों, मिठाईयों और सजावट के दाम इस वर्ष पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा हैं। चुनाव के पहले बहुत हुई महंगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार का नारा देने वाली मोदी सरकार अब महंगाई के जाल में फंसाकर जनता को मार रही है।
केंद्र सरकार के प्रति नाराजगी
देश आज अभूतपूर्व महंगाई और आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर रहा है। आम आदमी के पास त्योहार मनाने के लिए पैसे नहीं है। भाजपा द्वारा बढ़ाई गई महंगाई के कारण देश के सबसे बड़े त्यौहार दीवाली में भी उत्साह नहीं दिख रहा है। रंगाई-पुताई, फटाका, झालर, कपड़ा, सिलाई के साथ हर सेक्टर में 25 से 40 प्रतिशत तक दाम बढ़े हुए हैं। वर्तमान में मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग के लोगों को बेतहाशा महंगाई के कारण दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। महंगाई के इस दौर में लोग समझ नहीं पा रहे कि त्योहार कैसे मनाएं? पिछले 6 महीने में केंद्र की मोदी सरकार के समय डीजल-पेट्रोल के दामों में आए उछाल के कारण अन्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है। माल भाड़ा से लेकर हर सेक्टर के लोग इससे प्रभावित हुए हैं।
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