छत्तीसगढ़ के सुराजी ग्राम योजना से गोठानों में बढ़ा वर्मा कम्पोस्ट का उत्पादन
रायपुर। संपूर्ण विश्व में बढ़ती हुई जनसंख्या एक गंभीर समस्या है, बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ भोजन की आपूर्ति के लिए मानव द्वारा खाद्य उत्पादन की होड़ में अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए तरह-तरह की रासायनिक खादों, जहरीले कीटनाशकों का उपयोग, प्रकृति के जैविक और अजैविक पदार्थो के बीच आदान-प्रदान के चक्र को प्रभावित करता है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति खराब हो जाती है, साथ ही वातावरण प्रदूषित होता है तथा मनुष्य के स्वास्थ्य में गिरावट आती है। छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा गोठानों में वर्मा कम्पोस्ट उत्पादन को बढ़ावा देने से महिला समितियों को स्वावलंबन मिला है। समितियों के द्वारा बनाए गए वर्मा कम्पोस्ट की किसानों ने बड़ी मात्रा में खरीदी की जिससे उनकी आया में इजाफा हुआ है। अब सरकार सभी गोठानों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
प्राचीन काल में मानव स्वास्थ्य के अनुकुल और प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खेती की जाती थी, जिससे जैविक और अजैविक पदार्थो के बीच आदान-प्रदान का चक्र लगातार चलता रहा था, जिसके फलस्वरूप जल, भूमि, वायु और वातावरण प्रदूषित नहीं होता था। कृषि में तरह-तरह की रसायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग हो रहा है, जिसके फलस्वरूप जैविक और अजैविक पदार्थो के चक्र का संतुलन बिगड़ता जा रहा है और वातावरण प्रदूषित होकर, मानव जाति के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। अब हम रसायनिक खादों, जहरीले कीटनाशकों के उपयोग के स्थान पर, जैविक खाद और दवाईयों का उपयोग कर, ज्यादा से ज्यादा उत्पादन कर सकते हैं। जिससे भूमि, जल और वातावरण शुध्द रहेगा और मनुष्य एवं प्रत्येक जीवधारी स्वस्थ रहेंगे।
जैविक खाद को बढ़ावा दे रही छत्तीसगढ़ सरकार
देश के ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है। ये किसानों की मुख्य आय का साधन भी है। हरित क्रांति के समय से बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए एवं आय की दृष्टि से उत्पादन बढ़ाना आवश्यक है। ज्यादा उत्पादन के लिए खेती में ज्यादा मात्रा में रासायनिक उर्वरको और कीटनाशक का उपयोग करना पड़ता है। जिससे सीमांत और छोटे किसान के पास कम जोत में अत्यधिक लागत लग रही है और जल, भूमि, वायु और वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है। साथ ही खाद्य पदार्थ भी जहरीले हो रहे हैं। इसलिए इस तरह की उपरोक्त सभी समस्याओं से निपटने के लिये पिछले साल से लगातार टिकाऊ खेती के सिद्धांत पर खेती करने की सिफारिश की गई, जिसे मुख्यमंत्री भूपे्रश बघेल के नेतृत्व में कृषि विभाग ने इस विशेष प्रकार की खेती को अपनाने के लिए, बढ़ावा दिया। जिसे हम ‘जैविक खेती’ के नाम से जानते हेै।
खाद की कमी से निपटने में मदद
इस साल हमने देखा कि कोरोना की वजह से रासायनिक खादों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति में कठिनाई हो रही है, इसलिए रासायनिक खाद की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे देशभर के किसान प्रभावित हो रहे हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राष्ट्रीय स्तर पर जैविक खाद के उत्पादन को बढ़ावा देने और जैविक खेती की दिशा में आगे बढऩे पर जोर दिया है। रासायनिक खाद की कमी की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी, साथ ही स्वाइल हेल्थ अच्छी होगी और अच्छी गुणवत्ता की कृषि उपज मिलेगी।
सुराजी योजना से जैविक खाद उत्पादन को बढ़ावा
छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी ग्राम योजना नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी के जरिए सरकार गौठान को बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां पर गोबर खरीदी कर किसानों को लाभ दिया जा रहा है। वहीं गो-पालकों को दो रुपये प्रति किलो के हिसाब से गोबर खरीदी का फायदा मिल रहा हे। सरकार ने अब तक 169 करोड़ से ज्यादा की गोबर खरीदी की हे।
गोठान में वर्मी कम्पोस्ट बनाने को लेकर कांकेर जिला ने पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने को लेकर महिलाओं को प्रशिक्षण भी कृषि विभाग से दिया गया है। वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने से महिलाओं को इससे अच्छी आमदानी हो रही है। जितने गोठान में वर्मी कम्पोस्ट खाद का उत्पादन किया गया था। सभी में विक्रय किया गया है। गोठान में वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाए जाने को लेकर पूरे प्रदेश में कांकेर जिला ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
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