आप सभी जानते हैं कि शादी का सीजन चल रहा है ऐसे में ग्वालियर के शिवपुरी के एजवारा गांव में दरियादिली कि एक ऐसी मिसाल देखने को मिली कि हर कोई हैरान रह गया। दुल्हन के मामा न होने पर इस शादी में नोएडा के एक व्यापारी ने मामा का फर्ज निभाया और लाखों रुपए का अनोखा नरसी भात कर मिसाल पेश की। जानकारी के मुताबिक जिले के बदरवास जनपद पंचायत के एजवारा गांव में रहने वाले थान सिंह यादव की बेटी की शादी 20-21 नवंबर को थी। शादी में मंडप के नीचे भात की रस्म होने वाली थी लेकिन दुल्हन परेशान थी क्योंकि उसके कोई मामा नहीं थे। जब रस्म हो रही थी उसी दौरान नोएडा से गोविंद सिंघल नाम के कारोबारी परिवार के साथ गांव में पहुंचे। करोबारी ने कहा कि वह दुल्हन के मामा का फर्ज निभाएंगे और भात देने के लिए वह आए हैं।
जानकारी के मुताबिक दुल्हन की मां का कोई भाई नहीं था। उसके नाना भी 30 साल पहले सन्यासी हो कर चले गए थे। बेटी की शादी से पहले दुल्हन की मां ने अपने पिता को तलाशने की कोशिश की। उन्हें खबर मिली कि पिता उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के जेवर कस्बे में साधु के रूप में रह रहे हैं। दुल्हन की मां और पिता उनको तलाशने गौतमबुद्ध नगर पहुंचे। यहां उन्होंने साधु के भेष में बैठे पिता से कहा कि उसकी बेटी की शादी है, भात की रस्म के लिए आपको आना पड़ेगा। लेकिन, संन्यासी पिता ने बेटी और दामाद को इनकार कर दिया।
संयोग से वहीं बैठे नोएडा के कारोबारी गोविंद सिंघल ने संन्यासी पिता और बेटी की बातचीत सुनी. उसके बाद उन्होंने दुल्हन की मां और पिता से परेशानी पूछी। तब उन्होंने सिंघल को बताया कि उनका कोई भाई नहीं है। बेटी के लिए भात में मामा की रस्म कौन निभाएगा? कारोबारी सिंघल ने उनका पता, बेटी की शादी की तारीख ली और ये कहकर रवाना हो गए कि आप लोग घर जाइए भगवान सब अच्छा करेगा. उन्होंने उसी वक्त तय कर लिया था कि भात की रस्म वो अदा करेंगे। वो तय तारीख पर गांव पहुंचे और पूरी रस्म निभाई।
फरिश्ता साहूकार ने 9 तोला सोना और एक किलो चांदी के साथ साथ उन्होंने दूल्हे को एक लाख कैश, स्मार्टफोन दिया। गांव की 350 महिलाओं के लिए साड़ियां और पुरुषों के लिए 100 जोड़ी पैंट-शर्ट दिए। उन्होंने बारात में आए सभी बारातियों को भी उपहार दिए। व्यापारी गोविंद सिंघल के अनुसार जब उन्होंने बिना भाई की बहन का रुदन सुना तो उनसे रहा नहीं गया। उन्होंने उसी समय फैसला किया कि जिस तरह से भगवान कृष्ण की कथाओं में वर्णित नरसी भात प्रसंग में भात पहनाया गया था, उसी तरह मैं भी इस बहन को भात पहनाने जाउंगा।
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