रायपुर। छत्तीसगढ़ से सेंट्रल पूल के लिए उसना चावल नहीं लिए जाने के केंद्र सरकार के फैसले से उपजे हालात काबू में आ सकते हैं। राज्य के मिलरों का कहना है कि यदि राज्य सरकार उसना मिल संचालकों को कस्टम मिलिंग की अनिवार्यता से मुक्त करते हुए उसना चावल के फ्री-सेल और एक्सपोर्ट की अनुमति दे दे, तो ये पूरा मामला निपट सकता है। केंद्र द्वारा उसना चावल ना लिए जाने से उसना राइस मिलें बंद हो सकती है और हजारों श्रमिक बेरोजगार हो सकते हैं।
केंद्र सरकार ने राज्य से 61.6 लाख मीट्रिक टन चावल सेंट्रल पूल में लेने की मंजूरी दी है, लेकिन शर्त ये है कि उसना चावल नहीं लिया जाएगा। केंद्र के इस फैसले से राज्य के करीब 500 मिलों के बंद होने की आशंका है। साथ ही इन मिलों में काम करने वाले मजदूरों से रोजगार भी छिन सकता है। इस संकट को लेकर राज्य सरकार भी चिंतित है। वह केंद्र से लगातार मांग कर रही है कि छत्तीसगढ़ से उसना चावल लिया जाए।
उसना चावल की भारी डिमांड
मिलरों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में तैयार होने वाले उसना चावल की मांग फ्री सेल में देश के कई राज्यों के साथ अफ्रीकी महाद्वीप के कई देशों में भी होती है। यह काम धान खरीदी की अवधि में प्रतिबंधित रहता है। प्रदेश में करीब 20 साल से उसना चावल बनाने, देश के राज्यों में बेचने के साथ कई देशों में एक्सपोर्ट करने का काम किया जा रहा है। प्रदेश में पैदा होने वाले धान में उसना किस्म के धान का उत्पादन भारी मात्रा में होता है।
jai sir is a dedicated news blogger at The Hind Press, known for his sharp insights and fact-based reporting. With a passion for current affairs and investigative journalism, he covers national, international, sports, science, headlines, political developments, environment, and social issues with clarity and integrity.
