मृतक के नाम पर चल रहा अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग मौन

शहर में एक गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहां बीते दो वर्षों से मृतक के नाम पर अस्पताल का संचालन हो रहा है।

“मां दंतेश्वरी ट्रॉमा एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल” नामक यह अस्पताल अब भी एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत है, जिसकी मृत्यु वर्ष 2022 में हो चुकी है।

सरकारी डॉक्टर निजी अस्पताल में सेवा में लगे

इस अस्पताल में जिला अस्पताल के चिकित्सकों की नियमित मौजूदगी भी पाई गई है। यह विभागीय नियमों के सीधे उल्लंघन का मामला है।

इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई, जो प्रशासनिक सुस्ती को उजागर करता है।

जांच टीम आई और लौट गई

मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद विभागीय अधिकारी अस्पताल पहुंचे। हालांकि उन्होंने सिर्फ कागज देखने की औपचारिकता निभाई और लौट गए।

न कोई पूछताछ, न अस्पताल को सील करने की कोशिश, न ही चिकित्सकों से जवाब-तलबी—इस रवैये से गहरी नाराजगी फैल रही है।

विभाग ने कार्रवाई के लिए आवेदन की मांग की

स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि जब तक किसी व्यक्ति द्वारा आवेदन नहीं किया जाएगा, तब तक विभाग हस्तक्षेप नहीं करेगा।

यह तर्क पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाता है क्योंकि मीडिया द्वारा प्रमाण सहित मामला पहले ही उजागर किया जा चुका है।

अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों रुकी?

विशेषज्ञों का कहना है कि मृतक के नाम पर पंजीकृत संस्थान के खिलाफ तत्काल FIR, लाइसेंस रद्दीकरण और सीलिंग की कार्रवाई अनिवार्य होती है।

लेकिन यहां स्थिति उलट है—अस्पताल संचालित हो रहा है, डॉक्टर सेवा दे रहे हैं, और अधिकारी मौन हैं।