जनता से जूड़े मामलों रोडे अटकाने वाले भाजपाईयों के अतिथि बन रहे सिंहदेव
रायुपर। कोरोना संकट काल के समय छत्तीसगढ़ सरकार को केंद्र की भाजपा सरकार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। चाहे वह टीकाकरण में वैक्सीन की सप्लाई हो या फिर वेङ्क्षटलेटर मुहैया कराने का मामला हो। सभी में राज्य को अपने संसाधनों से ही कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करना पड़ा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस दौरान लगातार दौरा कर कोरोना प्रभावितों की सहायता करते रहे। इस संकट काल में कोरोना को परास्त करने में कांग्रेस सरकार जुटी रही वहीं सभी जुटे रहे, तो प्रदेश की भाजपा संगठन केवल कोरोना के नाम पर पॉलिटिक्स में व्यस्त रही। प्रदेश में टीकाकरण की आपूर्ति नहीं होने के बाद भी इस समय संवेदनशीलता के साथ जनमानस को सहयोग करने की जरूरत थी, तब प्रदेश सरकार को भाजपा के लोग कोसते रहे। अब जब सत्कार की बारी आ रही है तब स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव उन्हीं भाजपा का आथित्य स्वीकार करने को आतूर हो रहे हैं।


राज्य की राजनीति में एक दूसरे का सम्मान हो पर जनता के मुद्दे पर विरोधियों को जवाब देने में कहीं कोई कमी नहीं होनी चाहिए। यह मुख्यमंत्री श्री बघेल ने हर मामले में कर दिखाया है। वहीं श्री सिंहदेव ऐसे मामलों में उनको जवाब देने के बजाय उनके आमंत्रण को स्वीकार कर क्या संदेश देना चाहते हैं समझ के करे है।
पिछले दिनों भाजपा जिला अध्यक्ष और उनके समर्थित भाजपा नेताओं के कोरोना वारियर्स सम्मान के कार्यक्रम को लेकर टीएस सिंहदेव में आमंत्रण स्वीकार कर रहे हैं। उन्हें इस बात का भान होना चाहिए कि संकट के समय में जिन लोगों ने सहायता के बदले हमेशा बेरियर खड़े किया उन लोगों का सत्कार पाने हम इतने लालायित क्यों होने लगे हैं। एक तरफ केंद्र की भाजपा सरकार हर योजना में राज्य को नजरअंदाज करते जा रहा है। मामला चाहे राज्य के विकास का हो या फि र जनता को मिलने वाली सुविधाओं का हो कहीं- कहीं उसमेें बाधक बने हैं। समय के अनुसार राजनीति से परे कार्यक्रमों को छोड़ दिया जाए तो वे भाजपा के लोगों से नजदीकी बनाने में ही लगे रहे।
किसान और धान पर सियासत
केंद्र की भाजपा सरकार ने किसान और उनकी उपज धान को सही मूल्य देने के मामले में जमकर सियासत की। राज्य सरकार ने अपने वादे के मुताबिक उनकी उपज को 2500 प्रति ङ्क्षक्वटल की दर से खरीदी शुरू की तो केंद्र ने इसे बोनस बताकर चावल लेने की लिमिट को घटा दिया। धान खरीदी के लिए बारदाना सप्लाई को कोरोना के नाम पर बाधित किया। ऐसे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसके लिए व्यवस्था बनाई और वादे के मुताबिक उनकी उपज की खरीदी करने के साथ ही उन्हें पूरा मूल्य दिलाया। अब भी केंद्र राज्य को उसना और अरवा चावल के नाम से उनकी उपज को खरीदने पर व्यवधान छाल रहा है। जिस राज्य में 80 प्रतिशत उसना चावल बनाता है वहां पर शत प्रतिशत अरवा चावल मिलिंग कर देने का दबाव बना रहा है। केंद्र के तुगलकी फरमान से राइस मिलरों पर संकट गहराया है। राज्य भाजपा के नेता ऐसे मामलों में केंद्र को पत्र लिखने के बजाय केवल राजनीति कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने किसानों की उपज की चिंता कर केंद्र को पत्र लिखा है कि राज्य से 30 प्रतिशत उसना चावल लेने की अनुमति दें। उनकों इस मुद्दे पर भाजपा का सहयोग कतई नहीं मिल रहा है।
जीएसटी और आवास योजनाओं पर रार
एक ओर भाजपा केंद्र सरकार राज्य सरकार की जीएसटी रोक कर रखी है। पिछले दो सालों का जीएसटी का बकाया देने में देर कर ही है। वहीं ग्रामीण आवास योजना के तहत केंद्र द्वारा दएि गए टारगेट में भी कटौती करने में लगी है। राज्य में आवास निर्माण को लेकर पंचायत विभाग के द्वारा हर प्रयास करने के बाद कोराना काल में केंद्र ने सहायता राशि जारी नहीं किया। इसके चलते राज्य बनने वाले लाखों ग्रामीण आवास की नींव तक नहीं रखी जा सकी। वहीं जीएसटी को लेकर वाणिज्यिक कर विभाग के प्रस्ताव देने के बाद भी जीएसटी कौंसिल में राज्य के कह नहीं मिल पा रहा है। राज्य की मांग के अनुरूप राशि नहीं मिलने से विकास कार्यों पर विपरीत असर पड़ रहा है।
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