बिलासपुर के विधायक शैलेष पांडे इन दिनों किसी दूसरी ही दुनिया में हैं। ना तो उनसे अपनी विधायकी संभाली जा रही है और ना ही उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों से बात करने की सुध है।आए दिन शैलेष पाण्डेय अपनी उल-जलूल गतिविधियों से चर्चा में बनें रहते हैं। ताजा मामले में उन्होंने अपने ही प्रशासन को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।
मामला बिलासपुर में आयोजित राज्योत्सव से जुड़ा है। विधायक का कहना था कि राज्योत्सव में शासन ने किसी भी विधायक को निमंत्रण नहीं भेजा। लिहाजा बिलासपुर कलेक्टर के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज करके कार्रवाई की जाए। इसके लिए उन्होंने सीएम भूपेश बघेल को पत्र भी लिखा है।
शैलेष पाण्डेय की इस हरकत के बाद अब विपक्ष भी उनके समर्थन में खड़ा होता नहीं दिख रहा। बीजेपी नेता के मुताबिक शैलेष पाण्डेय जनसेवा भूलकर सिर्फ अपनी आवाभगत कराने में जुटे हैं। ना तो शैलेष पाण्डेय कोई राजा है और ना ही छत्तीसगढ़ की जनता उनकी प्रजा ऐसे में उनको वीआईपी ट्रीटमेंट देने का सवाल ही नहीं पैदा होता।
ऊपर से सरकार ने राज्योत्सव के दौरान प्रोटोकॉल के तहत उन सभी गणमान्यों को बुलाया जिनकी उस आयोजन में उपस्थिति की जरूरत थी। इस आयोजन को लेकर किसी दूसरे विधायक ने कोई बात नहीं कहीं है लेकिन शैलेष पाण्डेय ने ना जाने एक बाऱ फिर इस तरह की हरकत करके खुद की फजीहत करा ली है।
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