केंद्रीय जेल रायपुर में जीवन ठाकुर की मौत के बाद जनभावनाओं में भारी उबाल देखने को मिल रहा है। आदिवासी समाज ने इस मौत को संदिग्ध बताते हुए शुक्रवार को चारामा थाना क्षेत्र के सामने नेशनल हाईवे 30 पर चक्का जाम कर जबरदस्त विरोध दर्ज कराया।

विरोध प्रदर्शन के चलते हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें बन गईं और आवागमन पूरी तरह रुक गया। बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया, हालांकि प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे केवल न्याय और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

परिजन भी उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं और इसी के चलते शव लेने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक घटना की सच्चाई सामने नहीं आती, आंदोलन जारी रहेगा।

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब सर्व पिछड़ा वर्ग समाज ने भी जीवन ठाकुर की मौत पर सवाल उठाते हुए विरोध का समर्थन किया। प्रदेश अध्यक्ष जगन्नाथ साहू, संभागीय उपाध्यक्ष अरविंद जैन, जिला अध्यक्ष मटेश्वर जैन और संरक्षक हरेश चक्रधारी ने कहा कि यदि प्रशासन ने उचित कदम नहीं उठाए तो वे भी आंदोलन और चक्का जाम करने को मजबूर होंगे।

स्पष्ट है कि रायपुर जेल में जीवन ठाकुर की मृत्यु अब एक प्रशासनिक केस से बदलकर सामाजिक न्याय और जनआक्रोश का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में प्रदर्शन और भी व्यापक हो सकते हैं।