सूरजपुर जिले के प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास में हालात बाढ़ जैसे हो चुके हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी बारिश ने प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है। करीब 100 छात्र जलभराव से जूझ रहे हैं और छात्रावास परिसर पूरी तरह पानी में डूबा हुआ है।
कमरों में घुटनों तक पानी भर चुका है। गलियारों और स्नानागार तक पहुंचना भी अब बच्चों के लिए चुनौती बन गया है। बारिश रुकने के बाद भी पानी का निकास न होने से परिसर एक तालाब में तब्दील हो गया है। छात्रावास जलभराव समस्या गंभीर बन चुकी है।
छात्रों को हर दिन गंदे पानी से होकर भोजनशाला और पढ़ाई के कक्ष तक जाना पड़ता है। यही नहीं, परिसर में रात के अंधेरे में सांप-बिच्छू घुसने का डर भी बना रहता है। बच्चों की नींद, पढ़ाई और सुरक्षा—तीनों संकट में हैं।
छात्रावास की दीवारें पुरानी और कमजोर हो चुकी हैं। छत से लगातार पानी टपक रहा है और बिजली के तारों पर भी खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों ने कई बार इसकी शिकायतें की हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
स्थिति को देखते हुए जनपद अध्यक्ष डॉ. स्वाति सिंह ने निरीक्षण किया और बच्चों को अस्थायी तौर पर दूसरी जगह स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही पीडब्ल्यूडी विभाग को छात्रावास के लिए नए भवन का प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।
छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा अब प्रशासनिक प्राथमिकता बन चुका है। यदि समय रहते नया भवन स्वीकृत नहीं हुआ, तो अगली बारिश में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
इस संकट ने यह दिखा दिया है कि बुनियादी ढांचे की अनदेखी किस प्रकार छात्रों की पढ़ाई और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। छात्रावास जलभराव समस्या पर गंभीर नीति और स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
