मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के राजकीय गमछे का लोकार्पण
रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के राजकीय गमछे का लोकार्पण किया। छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ द्वारा राज्य की पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने वाले ये गमछे टसर सिल्क एवं कॉटन बुनकरों तथा गोदना हस्त शिल्पियों द्वारा तैयार कराए गए हैं। राजकीय गमछा देखकर कोई भी अतिथि छत्तीसगढ़ के भौगोलिक, सांस्कृतिक, कलाकृति और यहां की समृद्ध धरोहर के बारे में पूरी जानकारी पा सकेंगे। इसमें उकेरे गए एक-एक चित्र यहां की पूरी कहानी कहती है। ऐसा एक खास तरह का गमछा यहां पर कोसा और खादी के प्रयोग से बनाकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य को एक खास पहचान देने की कोशिश की है।


मुख्यमंत्री भूपेश बघ्ेाल ने खास तरह के गमछे को जारी कर फिर एक बाद छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति को प्रदेश और देश के बाहर फैलाने का एक प्रयास है। जब हम छत्तीसगढ़ संस्कृति की बात करते हैं तो उसका हिस्सा सभी धर्म, जाति, प्रांत और समाज के लोग हैं। अत: संस्कृति को बचाना उन सभी लोगों की जिम्मेदारी है, जो खुद को छत्तीसगढिय़ा मानते हैं। बाजारवाद और आधुनिकता के बुरे प्रचलन के दौर में हम अपनी संस्कृति को बचाएं। छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार जब से सत्ता में आई है, यहां पर नरवा,गरूआ, घुरवा, बाड़ी योजना को लांच करते समय संकेत दिया था कि इसके जरिए प्राकृतिक संतुलन बनाकर लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करना है।किसानों को उनके प्रकृति के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की ओर संकेत करता है। उनके हर उपज का सही मूल्य मिले उसके लिए बाजार की व्यवस्था और उनका जीव ग्रामीण परिवेश में सुचारू रूप से चले ताकी वह अपने परिवेश रहकर राज्य के संस्कृति को बढ़ावा देने का काम करें। यहां तक उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पौनी पसारी योजना के तहत हर नगरीय निकाय में जगह उपलब्ध कराई है। हस्त और शिल्पकला को प्रोत्साहन मिले इसे लेकर राज्य के पांचों संभाग के खास पहचान को गमछे में उकेरित कर पूरे छत्तीसगढ़ को इसमें दिखाया गया है।


राजकीय पशु-पक्षी से लेकर बस्तर से सरगुजा तक
गमछे पर छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, राजकीय पशु वन भैंसा, मांदर, बस्तर के प्रसिद्ध गौर मुकुट और लोक नृत्य करते लोक कलाकारों के चित्र गोदना चित्रकारी से अंकित किए गए हैं। वहीं इसमें राज्य वन और वन्य जीवों को स्थान देकर यह बताने का प्रयास किया गया है कि राज्य के आदिवासी क्षेत्र के लोगों की प्रतिबद्धता की वजह से अपने राज्य में वन्य जीवों का संरक्षण भी किया गया है। गमछे की डिजाईन में धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ राज्य को प्रदर्शित करने के लिए धान की बाली तथा हल जोतते किसान को प्रदर्शित किया गया है। सरगुजा की पारंपरिक भित्ति चित्र कला की छाप गमछे के बार्डर में अंकित की गई है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ की अस्मिता को बचाए और बनाए रखने के साथ उसे आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। अब छत्तीसगढ़ संस्कृति को लोग राज्य के बाहर भी जान और पहचान सकेंगे।