अंबिकापुर जिले का मैनपाट बेशुमार प्राकृतिक खूबसूरती और भौगोलिक रहस्यों के लिए प्रसिद्ध है। यहां दलदली की स्पंजी जमीन में उछलने के साथ ही एक फूंक मारकर आप धरती की ‘करुण पुकार’ सुन सकते हैं। घने जंगल के बीच दलदली के पास रहने वाले लोग जलजली देवी का आह्वान करते हुए जमीन में जैसे ही फूंक मारते हैं, वैसे ही शंख की ध्वनि गूंजने लगती है।

उस ध्वनि को वनदेवी का आशीर्वाद मानकर स्थानीय लोग किसी भी शुभ काम की शुरुआत करते हैं। यह आवाज भूगर्भशास्त्रियों के लिए पहेली है। दलदली में धरती माता की पुकार पर्यटकों को सुनाने का हुनर महज चंद स्थानीय लोगों के पास है, जिसमें से एक, ग्राम पंचायत लुरेना के 50 वर्षीय जद्दू यादव हैं। जद्दू बताते हैं कि वे बचपन से जमीन में फूंक मारकर धरती माता की पुकार सुनते आ रहे हैं। उन्होंने जमीन में लगभग एक फीट गहरा गड्ढा खोदा है। इसके पास दो छेद बनाए हैं। जैसे ही छोटे छेद से फूंक मारते हैं, शंखनाद की ध्वनि सुनाई देती है।

2.5 एकड़ में है दलदली
छत्तीसगढ़ के मैनहाट में जलजली नदी के किनारे हिलने वाला दलदली लगभग ढाई एकड़ में फैला है। यहां पैर रखते ही जमीन धंसने लगती है और चंद सेकंड में आपके पैर गेंद की तरह उछलने लगते हैं। भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार यह जगह ‘लिक्विफ्रैक्शन’ का उदाहरण है जो बताता है कि दलदली में भूकंप जैसा प्रभाव भी आ सकता है। दलदली के आप पास रहने वाले लोगों ने बताया कि ढाई एकड़ के संरक्षित जमीन में छेद करके जहां फूंक मारोगे वहां से आवाज आती है। वन विभाग की संरक्षण में होने के चलते जलजली में विशेष मौकों पर ही स्थानीय लोग एकत्रित होकर वन देवी की पुकार सुनते हैं।
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