पश्चिम एशिया में इस समय तनाव चरम पर है। अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े सैन्य हमलों के बाद क्षेत्र में व्यापक संघर्ष छिड़ गया है। पिछले एक सप्ताह में यह टकराव लगातार तेज हुआ है और इसके प्रभाव अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार तक दिखाई देने लगे हैं।

इस युद्ध में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। वहीं, ईरान में बड़ी संख्या में नागरिकों के हताहत होने की रिपोर्ट सामने आई है। हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया।

युद्ध की शुरुआत और पहला बड़ा हमला

28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया। इस ऑपरेशन में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और भारी मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। कई सरकारी इमारतों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस अभियान को अमेरिका ने “एपिक फ्यूरी” और इस्राइल ने “रोरिंग लायन” नाम दिया।

दूसरे दिन बढ़ी सैन्य कार्रवाई

1 मार्च को दोनों पक्षों ने हमले और तेज कर दिए। अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान के कई नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के मुख्यालय को नुकसान पहुंचाया। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला किया।

तीसरे दिन लेबनान भी बना युद्ध का मैदान

2 मार्च को यह संघर्ष लेबनान तक फैल गया, जब हिजबुल्ला ने इस्राइल पर मिसाइलें दागीं। इसके जवाब में इस्राइल ने बेरूत पर हवाई हमले किए। वहीं ईरान ने सऊदी अरब की रास तनुरा तेल रिफाइनरी को निशाना बनाकर ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बनाने की कोशिश की।

चौथे दिन रणनीतिक दबाव

3 मार्च को अमेरिका ने बंकर बस्टर हथियारों से लैस बी-2 बॉम्बर तैनात किए। इसी दौरान ईरान ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने लगी।

पांचवें दिन समुद्री मोर्चे पर बड़ा झटका

4 मार्च को हिंद महासागर में एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया। अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस देना को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। यह जहाज भारत में आयोजित नौसैनिक अभ्यास से लौट रहा था। इस हमले में कई ईरानी नाविकों की मौत हो गई, जबकि कुछ को बचाकर श्रीलंका में इलाज दिया गया।

ड्रोन और मिसाइल हमलों से बढ़ा खतरा

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी क्षेत्र के कई ठिकानों को निशाना बनाया। सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात के कई इलाकों में ड्रोन और मिसाइल हमले हुए। हालांकि कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया।

मानवीय संकट और वैश्विक असर

लगातार हमलों से नागरिक इलाकों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। स्कूलों और रिहायशी इलाकों में हुए हमलों से मानवीय संकट गहराने लगा है। इसके अलावा तेल आपूर्ति पर असर पड़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।

आगे क्या हो सकता है?

विश्लेषकों का मानना है कि अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष और लंबा खिंच सकता है। क्षेत्रीय शक्तियों के शामिल होने की संभावना से हालात और गंभीर हो सकते हैं।