प्रदेश में अभी 3 कालेज में ही होती है पढ़ाई

रायपुर। राज्य में इस साल बीए.बीएड व बीएससी.बीएड की पढ़ाई नए कॉलेजों में होने की संभावना कम है। नेशनल काउंसिल फाॅर टेक्निकल एजुकेशन यानी एनसीटीई से इसके लिए अब तक आवेदन ही नहीं मंगाए गए हैं। बिना मान्यता मिले यह कोर्स शुरू नहीं हो सकता। दुर्ग व सरगुजा विवि से जुड़े अभी तीन कॉलेजों में यह कोर्स संचालित है।
कुछ माह पूर्व पहले समन्वय समिति की बैठक में
बीए.बीएड व बीएससी.बीएड की पढ़ाई अन्य कॉलेजों में भी शुरू करने की चर्चा हुई थी। कॉलेजों में यह कोर्स शुरू करने पर जाेर दिया गया।
शिक्षाविदों का कहना है कि एनसीटीई से कोर्स को मान्यता मिलती है। इसके बाद विश्वविद्यालय संबद्धता देते हैं। पहले मान्यता जरूरी है। रविवि ने बीए.बीएड व बीएससी.बीएड का कोर्स शुरू करने के ऑर्डिनेंस में संशोधन करना होगा।
बता दें कि राज्य में दो वर्षीय बीएड कोर्स का चलन है। जिसकी साढ़े 14 हजार सीटें हैं। लेकिन नई शिक्षा नीति में चार वर्षीय बीएड कोर्स पर जाेर दिया गया है। इसलिए इसकी मांग है। राज्य में दुर्ग विवि से जुड़े दो कॉलेज व सरगुजा विवि से जुड़े एक कॉलेज में बीए.बीएड और बीएससी.बीएड की पढ़ाई चल रही है। करीब चार-पांच साल पहले यहां यह कोर्स शुरू हुआ था। इनकी करीब 200 सीटें हैं। एडमिशन के लिए हर साल मारामारी हो जाती है। बीएससी.बीएड की डिमांड ज्यादा है। नए कॉलेज में भी यह कोर्स शुरू होने से छात्रों को फायदा होगा। लेकिन अभी इसके लिए इंतजार करना होगा।
अभी बीएड में प्रवेश के लिए ग्रेजुएशन होना जरूरी है। इसकी अवधि दो वर्ष की है। लेकिन बीए.बीएड व बीएससी.बीएड कोर्स की अवधि चार वर्ष की है। इसमें बारहवीं के बाद छात्रों को सीधे प्रवेश मिलेगा। जैसे छात्र यदि आर्ट्स से संबंधित है तो वे बीए.बीएड में प्रवेश ले सकेंगे और साइंस से जुड़े छात्रों को बीएससी.बीएड में एडमिशन मिलेगा। शिक्षाविदों का कहना है कि इससे उन छात्रों को फायदा होगा जो टीचर बनना चाहते हैं, क्योंकि बारहवीं के बाद बीएड करने से उनका एक साल बच जाएगा। वे ग्रेजुएट भी हो जाएंगे और बीएड की पढ़ाई भी पूरी हो जाएगी। ग्रेजुएशन के आधार पर बीएड करने से कम से कम 5 साल लगते हैं।