- चार निगम, छह नगर पंचायत और तीन नगर पालिका में बहुमत
- मुख्यमंत्री निवास से तय होगा भिलाई-चरोदा का महापौर
रायपुर। पहले विधानसभा चुनाव, फिर नगर निगमों में महापौर के चुनाव और अब 15 निकायों के चुनाव…कांग्रेस को ऐसी जीत मिली, जिसकी कल्पना खुद कांग्रेस ने भी नहीं की थी। भिलाई, रिसाली, भिलाई-चरोदा और बीरगांव चारों में कांग्रेस के महापौर बनने जा रहे हैं। वहीं, 5 में से 4 पालिकाओं पर भी कांग्रेस का कब्जा हो चुका है। सिर्फ जामुल में भाजपा को बढ़त मिली। वहीं सभी 6 नगर पंचायतों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। प्रदेश के चार नगर निगमों में से भिलाई और रिसाली में कांग्रेस पार्षदों की बहुमत से हुई जीत ने कांग्रेसी महापौर बनाने का रास्ता साफ कर दिया, वहीं बीरगांव और चरोदा में कांग्रेस 2 सीटों से पीछे है लेकिन पार्टी से ही बगावत करने वाले निर्दलियों की जीत ने वहां भी कांग्रेसी महापौर की संभावनाएं बढ़ा दी हैं। दस जिलों के 15 नगरीय निकायों हुए चुनाव में कांग्रेस की जीत के 5 कारण राजनीतिक विशलेषक बता रहे हैं।
इनमें कांग्रेस ने तीन महीने पहले वर्किंग शुरू की, बूथ से सुझाव के आधार पर सभी प्रत्याशी तय किए। स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी, राज्य की कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस किया। लगातार फील्ड पर उतरकर लोगों की समस्याओं से अवगत हुए, समस्या निराकृत की। समय रहते घोषणापत्र लेकर आए, इसकी वजह से जनता को समझने का मौका मिला। अपने कामों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया, जनता तक बात पहुंचाने में सफल रहे। वहीं भाजपा की हार के 5 कारण प्रत्याशी चयन में एक गुट विशेष के लोगों का ठप्पा लगा रहा, दूसरों ने काम ही नहीं किया। घोषणा पत्र जारी करने में देरी की, इस वजह से जनता ने उसे सीधे नकार दिया। प्रचार-प्रसार के कामों में बीजेपी के नेताओं में एकजुटता देखने को नहीं मिली। निकाय चुनाव से पहले हुए वार्ड परिसीमन कई दिग्गजों की जीत के आड़े आया। ट्विनसिटी सहित अन्य जगहों पर कोरोनाकाल की निष्क्रियता जीत के आड़े आई।
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जोड़-तोड़ से बचने कांग्रेस पार्षद अंडरग्राउंड
गुरुवार को निकाय चुनाव के नतीजे आए और शुक्रवार को जीते हुए सभी कांग्रेसी पार्षद गायब हैं। किसी का फोन नहीं लगा ता रहा तो किसी ने मोबाइल बंद कर रखा है। रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव के 300 पार्षदों को रायपुर, महासमुंद से लगे टूरिस्ट रिजॉर्ट और होटलों में रखे जाने की खबर है। ऐसा इस वजह से कि कहीं सियासी जोड़-तोड़ का हथकंडा काम न कर जाए और हाथ आई जीत कांग्रेस से फिसल न जाए। पार्षद ही मेयर चुनेंगे इसलिए पार्टियां ज्यादा से ज्यादा इन्हें अपने पाले में रखने की कोशिश में जुटी हैं। पार्षद कांग्रेस के प्रति वफादार रहें, इसलिए सभी को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की निगरानी में अलग-अलग जगहों पर भेजा गया है, कुछ को भेजा जा रहा है। जिन पार्षदों को खुफिया ठिकानों पर रखा गया है उनमें रायपुर के बीरगांव, दुर्ग जिले के चरौदा, रिसाली और खैरागढ़ के पार्षद शामिल हैं।
महापौर-सभापति के संंभावित दावेदार
निकाय चुनाव में बीरगांव में महापौर के लिए ओबीसी को महापौर बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की है। यहां पर नंदलाल देवांगन ओर इकराम कुरैशी का नाम महापौर के लिए सामने आया है। भिलाई-चरोदा में मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। कांग्रेस से वार्ड-31 की प्रत्याशी भारती राम सूर्यवंशी चुनाव जीतकर आई हैं। वार्ड-35 से कांग्रेस के प्रत्याशी ललित दुर्गा चुनाव जीतकर आए हैं। इसी तरह से वार्ड-40 से कांग्रेस के जिलाध्यक्ष निर्मल कोसरे चुनाव जीतकर आए हैं। इनमें से किसी एक के नाम पर मुहर लगने की उम्मीद है।
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सीएम हाउस और स्थानीय विधायक व मंत्री मिलकर इस मामले में एक नाम तय करेंगे। सभापति के लिए नेता प्रतिपक्ष संतोष तिवारी, सीनियर पार्षद कृष्णा चंद्राकर, एस वेंकट रमना, मोहन साहू का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। इसका भी फैसला भी सीएम हाउस से ही होना है। भिलाईनगर में महापौर युवा और नया चेहरा हो सकता है। पार्टी के वरिष्ठ पार्षदों में से कोई सभापति बनेगा ताकि उन्हें सदन में उचित संरक्षण मिल सके। फिलहाल महापौर और सभापति के दावेदारों में सबसे ज्यादा एकांश बंछोर, आदित्य सिंह, नीरज पाल, सीजू एंथोनी, लक्ष्मीपति राजू और सुभद्रा सिंह का नाम चल रहा है।
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