छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़, संतुलित और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए राज्य सरकार ने युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लागू किया, जिसके प्रभावी परिणाम अब सामने आने लगे हैं। यह प्रक्रिया शिक्षा के अधिकार अधिनियम-2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के तहत की गई है, जिससे राज्य की प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शिक्षा प्रणाली को नई दिशा मिली है।

युक्तियुक्तकरण से पहले राज्य में कुल 453 विद्यालय शिक्षकविहीन थे, जिससे वहां पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेकिन इस नई प्रक्रिया के बाद अब राज्य में एक भी विद्यालय शिक्षकविहीन नहीं रह गया है। यह स्थिति शिक्षा में सुधार युक्तियुक्तकरण के प्रभावशाली क्रियान्वयन को दर्शाती है।

👩‍🏫 एकल शिक्षकीय विद्यालयों में बड़ा सुधार

राज्य में पहले 5936 विद्यालय ऐसे थे, जहां केवल एक शिक्षक कार्यरत थे। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत इनमें से 4728 विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। इससे न केवल शिक्षकों पर कार्यभार कम हुआ है, बल्कि विद्यार्थियों को विषयानुसार शिक्षा देने में भी आसानी हुई है। यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता और व्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है।

📌 बस्तर और सरगुजा संभाग में होगी पूर्ति

हालांकि, बस्तर और सरगुजा संभाग के कुछ जिलों में अभी भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इन क्षेत्रों में करीब 1208 विद्यालय अभी भी एकल शिक्षकीय हैं। लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि निकट भविष्य में प्रधान पाठकों और व्याख्याताओं की पदोन्नति, साथ ही लगभग 5000 शिक्षकों की सीधी भर्ती कर इन स्कूलों में शिक्षकों की पूर्ण व्यवस्था कर दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि राज्य का कोई भी विद्यालय एकल शिक्षकीय न रहे, और शिक्षा में समानता सुनिश्चित की जा सके।

⚖️ अनियमितता पर होगी कार्रवाई

इस प्रक्रिया के दौरान अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा कोई अनियमितता की गई है, तो उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। शिक्षा विभाग द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2008 के सेटअप की वर्तमान में कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है, इसलिए अब नई व्यवस्था के अनुसार ही शिक्षकों की नियुक्ति और व्यवस्था की जा रही है।