शराब घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, भूपेश बघेल और चैतन्य को हाईकोर्ट भेजा
छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल को राहत नहीं दी है। गिरफ्तारी से बचने के लिए दायर याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया और उन्हें हाईकोर्ट का रुख करने को कहा है।
ईडी की कार्यवाही और गिरफ्तारी
18 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चैतन्य बघेल को भिलाई स्थित उनके निवास से गिरफ्तार किया। संयोग से उस दिन उनका जन्मदिन भी था। यह गिरफ्तारी धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई थी। न्यायालय ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, और अब 18 अगस्त को फिर से पेश किया जाएगा।
ईडी का आरोप: करोड़ों की अवैध संपत्ति
ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, चैतन्य बघेल को 16.70 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (POC) प्राप्त हुई, जिसे उन्होंने अपनी रियल एस्टेट फर्मों के माध्यम से वैध रूप में दर्शाने की कोशिश की। उन्होंने नकद भुगतान, बैंक एंट्री और परियोजनाओं के नाम पर यह धन निवेश किया।
संपत्तियों की खरीददारी में फर्जीवाड़ा
जांच में यह भी पाया गया कि चैतन्य ने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलकर, कर्मचारियों के नाम पर फ्लैटों की बिक्री दर्शाकर 5 करोड़ रुपए का अप्रत्यक्ष लेन-देन किया। बैंकिंग ट्रेल यह दिखाता है कि यह राशि शराब सिंडिकेट से प्राप्त हुई थी।
1000 करोड़ से अधिक की संपत्ति का संचालन
ईडी के अनुसार, चैतन्य ने इस शराब घोटाले से जुड़े 1000 करोड़ रुपए से अधिक के अवैध फंड को हैंडल किया और यह धन राज्य के प्रभावशाली राजनेताओं और सहयोगियों के माध्यम से आगे निवेश किया गया।
अब तक कई रसूखदार गिरफ्तार
इस केस में पहले ही अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर और कवासी लखमा जैसे नाम चर्चा में हैं और इन पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। ईडी इस पूरे मामले की कड़ी दर कड़ी जांच कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और अगला कदम
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह फिलहाल इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकता, इसलिए याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने सीधे संकेत दे दिया कि गिरफ्तारी से तुरंत राहत की कोई संभावना नहीं है।
राजनीतिक दृष्टि से असरदार मामला
यह मामला केवल एक घोटाला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति का बड़ा संकट बन गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और उनके बेटे पर लगे आरोप गंभीर हैं, और यदि जांच अपने निष्कर्ष तक पहुंचती है, तो राजनीतिक समीकरणों में भी बड़ा बदलाव संभव है।
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