खेती-किसानी छत्तीसगढ़ का आधार है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में खेती को लाभ का व्यावसाय बनाने के प्रयास सरकार बनते ही प्रारंभ किये थे। सरकार बनते ही किसानों की कर्जमाफी, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, सिंचाई कर माफी, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, सिंचाई क्षमता में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार कर खेती का सिंचित रकबा बढ़ाना, किसानों के लिए किये गये प्रयासों के बदौलत ही आज छत्तीसगढ़ का किसान सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और किसान इस सरकार को अपनी सरकार महसूस कर रहा है।
समूचा विश्व कोरोना महामारी को झेल चुका है, इसका प्रभाव हमारे रोज़मर्रा के जीवन पर भी पड़ा है और समाज के सभी वर्ग इससे प्रभावित हुए हैं। अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चुनौती का समय होने के बाद भी किसानों एवं खेतिहर भूमिहीन मजदूरों के हितों पर कोई आँच न आए, इसका ध्यान मुख्यमंत्री द्वारा बखूबी रखा जा रहा है। वास्तव में किसानों एवं भूमिहीन मजदूरों के हितों की रक्षा के लिये मुख्यमंत्री सदैव संकल्पित रहे हैं और यह उनकी नीतियों में भी निरंतर प्रतिबिंबित होती है। कोरोना महामारी के संकटकाल में छत्तीसगढ़ के मजदूर जिनके पास आय के न साधन थे, न ही उनके पास कृषि करने के लिए भूमि, वे अन्य शहरों तथा दूसरे प्रदेशों में शारीरिक श्रम करके अपना जीवन यापन करते थे। कोरोना काल में हुए लाकडॉउन के कारण वे अपने घर की ओर लौट आये। वे मजदूर अपने गाँव या आसपास में शारीरिक श्रम करके अपना जीवन यापन कर रहे थे, उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना से ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को प्रत्येक वर्ष 06 हजार रूपये की अनुदान सहायता राशि देने का निर्णय लिया है।


जिले में राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के तहत अब तक 381 आवेदन जमा किये गए हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के लिए पंजीयन 01 सितम्बर से शुरू हो गया है। मजदूर परिवार के मुखिया योजना का लाभ लेने के लिए 30 नवम्बर तक पंजीयन करा सकते है। पंजीकृत भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को 06 हजार रूपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। अब ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के अंतर्गत चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, पुरोहित जैसे पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवार, वनोपज संग्राहक , जिसकी जीविका का मुख्य साधन शारीरिक श्रम करना है, उन्हें इस योजना का लाभ दिया जाएगा। सरकार के इन फैसलों में यह साफ झलकता है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को न सिर्फ किसानों की चिंता है बल्कि उन्हें शारीरिक श्रम कर जीवन यापन करने वाले भूमिहीन खेतीहर मजदूरों की भी चिंता है। एक किसान पुत्र होने के कारण किसानों एवं भूमिहीन मजदूरों की वास्तविक तकलीफों को मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल बेहतर तरीके से समझते हैं। सरकार के इस कदम ने भूमिहीन मजदूरों के लिए आर्थिक मंदी के इस दौर में एक नया रास्ता खोल दिया है।
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