बीजेपी ने हालही में प्रदेश की कांग्रेस सरकार के वित्तीय प्रबंधन को सवालो के घेरे में खड़ा किया था। कुछ दिनों पहले आई कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए 15 साल तक सूबे में राज करने वाले पूर्व सीएम रमन सिंह ने मौजूदा राज्य सरकार को निकम्मा करार दिया। लेकिन क्या डॉक्टर साहब ये भूल गए हैं कि इस रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आए हैं, उसमें पूर्ववर्ती सरकार के वित्तीय प्रबंधन भी मायने रखता है ? कांग्रेस को सत्ता संभाले हुए बमुश्कील 3 महीने हुए होंगे, बावजूद इसके उसने 524 करोड़ की राशि खर्च की। तो आचार सहिंता से पहले बीजेपी क्या कर रही थी? ऐसे में वाकई ये सवाल खड़ा होता है कि वास्तव में निकम्मा कौन है?
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक 2018-2019 में कांग्रेस सरकार ने CGRDCL को सड़क निर्माण के लिए 1157 करोड़ रुपए की राशि का अलॉटमेंट किया था। जिसमें से 524 करोड़ रुपए खर्च हुए। अब इस पर भाजपा ने प्रदेश सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा का मानना है कि इस वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य सरकार ने पूरी राशि खर्च नहीं की है। कुल राशि में से 633 करोड़ खर्च ही नहीं किए गए हैं. इसे आधार मानते हुए बीजेपी ने भूपेश सरकार पर आरोप मढ़ते हुए ये कह दिया कि ये सरकार की लापरवाही और निकम्मापन है।
भाजपा का निशाना
अब सवाल ये है कि इस तरह के तथ्य के आधार पर क्या भाजपा कांग्रेस सरकार पर अनियमितता का आरोप लगा रही है? क्या ये नहीं हो सकता कि जो पैसे खर्च नहीं किए गए हैं, वे कहीं और इस्तमाल कर लिए गए हों ? क्योंकि राज्य में किसानों की आत्महत्या के मामले में कुछ कम हुए हैं, तो ये भी संभव है कि सरकार ने चमचाती सड़कों से बेहतर किसान की जिंदगी को ज्यादा तवज्जो दी हो !
भाजपा के दामन में भी कई दाग
ये भी मुमकीन है कि CAG की रिपोर्ट के आधार पर भाजपा, कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के एक भी आरोप नहीं लगा पाई हो। रिपोर्ट में ऐसी कोई भी गड़बड़ियां न मिली हो जिस पर भाजपा कांग्रेस पर कोई आरोप लगा सके। इसके पहले 15 सालों तक रमन सरकार के समय CAG की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन सरकार पर भ्रष्टाचार के अनेकों प्रमाणिक आरोप लगे थे। तो ऐसे में कांग्रेस का ये कहना गलत नहीं होगा कि मौजूदा सरकार ने कर्ज लेकर कई किसानों को आत्महत्या से बचा लिया है।
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