

कुछ माह पूर्व ही मिला था पद्म श्री पुरस्कार
रायपुर। पद्मश्री नंद किशोर प्रुस्टी का 104 वर्ष की आयु में आज निधन हो गया। एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे लोगों के बीच नंदा सर के नाम से प्रसिद्ध थे। पिछले महीने ही उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई दूसरे नेताओं ने शोक जताया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया- नंद किशोर प्रुस्टी जी के निधन से आहत हूं। ओडिशा में शिक्षा की खुशियों को फैलाने के उनके प्रयासों के कारण बहुत सम्मानित नंदा सर को पीढ़ियों तक याद किया जाएगा। उन्होंने कुछ हफ्ते पहले पद्म पुरस्कार समारोह में देश का ध्यान और स्नेह आकर्षित किया था।
गृह मंत्री अमित शाह ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि नन्द किशोर प्रुस्टी जी के निधन से गहरा दुख हुआ। उन्हें हाल ही में ओडिशा में बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने में उनके अग्रणी योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। राष्ट्र इस महान आत्मा को उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए हमेशा याद रखेगा।
ओडिशा के रहने वाले नंद किशोर प्रुस्टी को शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए पिछले महीने ही राष्ट्रपति के हाथों पद्म पुरस्कार मिला था। उनकी पढ़ाई अधूरी रह गई थी और वह केवल सातवीं तक ही पढ़ पाए थे। लेकिन उन्होंने अनपढ़ बच्चों को साक्षर बनाने का फैसला किया। पद्म पुरस्कार लेने के लिए यह वे नंगे पैर ही राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे। राष्ट्रपति ने जब केसरिया धोती और गमछे के साथ टोपी पहने 104 साल के बुजुर्ग को पद्म सम्मान दिया तो बदले में उन्होंने (बुजुर्ग ने)हाथ उठाकर राष्ट्रपति को आशीष दिया। राष्ट्रपति भवन की तरफ से यह फोटो ट्वीट की गई। फोटो का कैप्शन था, राष्ट्रपति कोविंद ने श्री नंदा प्रुस्टी को साहित्य और शिक्षा के लिए पद्म श्री प्रदान किया। दशकों तक ओडिशा के जाजपुर के जिले के कंतिरा गांव के रहने वाले और सात दशक से बच्चों-बुजुर्गों को शिक्षित कर रहे नंदा सर को आर्थिक तंगी के कारण 7वीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। उस समय वह अपने चाचा के साथ रहकर पढ़ाई कर रहे थे। इसके बाद उनके चाचा नौकरी के लिए कटक चले गए। ऐसे में उनके माता-पिता ने घर पर ही खेती के काम में हाथ बंटाने के लिए अपने पास ही रख लिया।
हर दिन सुबह बच्चे उनके घर के बाहर एकत्रित होते हैं। इसके बाद पेड़ के नीचे बच्चों को उड़िया शब्द ज्ञान के साथ ही गणित भी पढ़ाया जाता है। वह एक गैर पारंपरिक स्कूल चलाते हैं। ओडिशा में इसे चटशाली परंपरा के नाम से जाना जाता है। नंदा सर शाम को 6 बजे अशिक्षित बुजुर्गों को भी पढ़ाने का काम करते हैं। खास बात है कि वह इसे लिए बच्चो और बुजुर्गों से कोई फीस नहीं लेते हैं।


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