तीन दिनों में ही हो गई 4 लाख 43 हजार टन से ज्यादा की खरीदी
किसानों को राहत देने में कांग्रेस सरकार ने भाजपा को पछाड़ा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों के मुद्दे के साथ चुनाव लड़ने के बाद सत्ता में आयी कांग्रेस ने सरकार बनने के बाद कई क्रांतिकारी निर्णय किसानों और ग्रामीणों के हित में लिए हैं। इनमें से सबसे बड़ा फैसला न्यूनतम समर्थन मूल्य के बाद अंतर की राशि को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किसानों के जेब में पैसा डालना था, ताकि किसान आर्थिक रूप से समृद्ध हो सकें और उन्हें अपनी लागत का सही मूल्य मिल सके। इसके सकारात्मक परिणाम दिखने भी लगे हैं। अब आलम यह है कि राज्य में जहां बीते तीन साल में लगातार धान के रकबे और किसानों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है तो वहीं राज्य में साल-दर-साल धान खरीदी का नया रिकॉर्ड भी बन रहा है।
हालिया आंकड़ों की बात करें तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की किसान हित में लिए गए निर्णयों के बाद बीते तीन दिन में ही राज्य में चार लाख 43 हजार 431 टन धान की खरीदी हो चुकी है, जबकि राज्य में भाजपा के शासन काल के अंतिम दो वर्ष में यह आंकड़ा क्रमश: वर्ष 2016-17 में पहले तीन दिनों में 93 हजार 567 टन धान और वर्ष 2017-18 में 81 हजार 433 टन धान खरीदा गया था। बता दें कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद राज्य शासन ने किसानों की समस्या को देखते हुए राज्यभर में धान उपार्जन केन्द्रों की संख्या बढ़ाकर 2 हजार 415 तक कर दी है।
किसानों से किया वादा पूरा
वर्ष 2018-19 के चुनावी वर्ष में कांग्रेस ने किसानों से वायदा किया था कि राज्य में यदि उसकी सरकार बनी तो 2500 रुपए क्विंटल के भाव से धान की खरीदी की जाएगी। चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई और भूपेश बघेल ने 17 दिसंबर 2018 को मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाली। उनके द्वारा सत्ता संभालने से पहले ही हालांकि प्रदेश में धान खरीदी शुरू हो चुकी थी, लेकिन उन्होंने अपने वायदे के अनुरूप किसानों की कर्जमाफी के साथ ही 2500 रुपए क्विंटल के भाव से धान खरीदने और खरीदे जा चुके धान का भुगतान भी इसी दर से करने की घोषणा की।
इनपुट सब्सिडी का ऐलान
तब वर्ष 2018-19 में धान खरीदी केंद्रों में सुस्त रफ्तार से शुरू हुई धान खरीदी की प्रक्रिया ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद अचानक जोर पकड़ लिया। उस वर्ष राज्य में 80.38 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी शासन द्वारा की गई। इसके बाद के वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा किसानों को बोनस दिए जाने पर यह कहते हुए ऐतराज किया कि यदि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बोनस दिया जाएगा तो ऐसी सूरत में छत्तीसगढ़ का चावल केंद्रीय पुल में नहीं लिया जाएगा। केंद्र के इस रोड़े के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों को इनपुट सब्सिडी देने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री के इस ऐलान से कोरोना-संकट से जूझ रहे किसानों में नया उत्साह जागा।
साल दर साल बढ़ता रहा आंकड़ा
वर्ष 2019-20 के खरीफ सीजन में धान का उत्पादन बढ़ा और धान खरीदी केंद्रों में पहले तीन दिनों के आवक में बड़ा उछाल देखा गया। इस तीन दिन की अवधि में तब एक लाख 90 हजार 955 टन धान की खरीदी की गई। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में राजीव गांधी किसान न्याय योजना की निरंतरता से किसानों का उत्साह और बढ़ा। पहले तीन दिनों में धान खरीदी का आंकड़ा उछलकर 03 लाख 22 हजार 58 टन तक जा पहुंचा। इस बार, यानी खरीफ 2021-22 में किसानों के उत्साह में खासी बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ष पहले तीन दिनों में ही 4 लाख 43 हजार 441 टन धान की खरीदी हो चुकी है।
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