सुकमा।

3 दिसंबर को हर साल विश्व भर में दिव्यांग दिवस मनाया जाता है । ये दिन हर दिव्यांग के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है पर इस बार सुकमा नैना के लिए ये दिन बहुत ही खास था । ये दिन नैना के लिए डेरों खुशियों की दस्तक दे गया । आपको बता दें की नैना तीस वर्ष के कठिनाई भरे जीवन के बाद अब नैना अपने सपनों की उड़ान भर सकती है । इस मैके में नैना की आँखों में खुशी के आँसू और चेहरे पर मुस्कान थी ।

पूरा मामला

गोंगला के अंबिकापारा के निवासी मुन्ना नाग की सुपुत्री नैना नाग बचपन से पढ़ाई, खेलकूद के साथ घर के कामों में भी बहुत ही अच्छी रही है। नैना के जीवन में तीन साल पहले मानों ग्रहण लग गया उसके हँँसते-खेलता जीवन में दुखों का पहाड़ टूट गया। नैना की बहन कामिनी ने बताया की तीन बहनों में मंझोली नैना को तीन साल पहले खेलते समय सिर पर अंदरुनी चोट लगी थी, जिसके कारण उसकी सुनने की क्षमता समय के साथ दुर्बल होती चली गई। एक वक्त ऐसा आया कि नैना की सुनने की क्षमता लगभग ना के बराबर हो गई। मजदूरी कर के घर चलाने वाले मुन्ना नाग के लिए अपनी होनहार बिटिया के जीवन में आए इस असमय आहत को झेलना जितना मुश्किल रहा उससे कई अधिक कठिनाई ईलाज में हुई। ईलाज के लिए नैना को जिला चिकित्सालय में लाया गया जहाँ से उसे बेहतर परामर्श के लिए जगदलपुर रिफर किया। डाक्टरों ने ऑपरेश्न की आवश्यकता बताई लेकिन नैना के पिता की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण नैना का इलाज संभव नहीं हो पाया।

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आई परेशानी की बजह से छोड़नी पड़ी पढ़ाई

नैना के मामा के मुताबिक वह कुम्हाररास के पोटाकिबिन आश्रम में अध्ययनरत् थी। कक्षा 6वीं में खेल दौरान चोटिल होने के कारण उसे सुनने में परेशानी होने लगी, सुनने में समस्या के चलते नैना के लिए शब्दों को समझना बड़ी चुनौती रही, अक्षरों को पढ़ने में तो उसे कोई समस्या नहीं होती किन्तु उच्चारण समझ ना पाने के कारण उसे कक्षा में पढ़ाए पाठ स्मरण नहीं रहते थे। समय के साथ साथ उसे अच्छे से बोलने और सुनने में परेशानी बढ़ने लगी, कम उम्र में ही नैना के साथ ये हादसा हो गया जिसकी बजह से नैना बहुत दुखी रहने लगी थी और उसने अपने आगे की पढ़ाई कि उम्मीद पुरी तरह से छोड़ दी। 7 वीं एवं 8वीं कक्षा तक की पढ़ाई बड़ी ही मुश्किल से नैना ने पूरी कड़ी उसके बाद नैना निराश हो कर घर के कामों मे हाँथ बटाने लगी ।

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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से मिली जानकारी

जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र के सुकमा फिल्ड कॉडिनेटर ने नैना नाग को जानकारी गोंगला के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से प्राप्त हुई उसके बाद नैना के परिवार वाले की सहमति से जिला दिव्यांग पुनर्वास के तहत दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया गया। नैना को 40 प्रतिशत दिव्यांगता है।उसके बाद समाज कल्याण विभाग और जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र सुकमा के द्वारा बीते दिन 3 दिसम्बर 2021 को विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर नैना को श्रवणयंत्र प्रदान किया गया। श्रवणयंत्र की सहायता से वह सुनने में सक्षम हो गयी है और अभी वर्तमान में नैना अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ साथ अपना सुनहरा भविष्य बनायेंगी । अब नैने अपनी उड़ान भरेगी साथ ही साथ सपनों को साकार करेगी ।