- तीन नगर निगम ओर एक नगर पालिका में चुनाव पर सभी राजनीतिक दलों का फोकस
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव में राज्य चुनावी मैदान का अखाड़ा बना हुआ है। प्रदेश में निकाय चुनाव 10 जिलों में हो रहा है, लेकिन दुर्ग जिला सबसे अहम माना जा रहा है। राजनीतिक दलों का सबसे ज्यादा फोकस दुर्ग जिले के चार नगरीय निकाय, भिलाई चरौदा, रिसाली, भिलाई नगर निगम सहित जामुल नगर पालिका परिषद पर है। इन चारों सीट पर जीत हासिल करने के लिए कांग्रेस से लेकर भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव के लिए 20 दिसंबर को वोटिंग और 23 दिसंबर को मतगणना होगी।
दुर्ग जिले के चार सीट कांग्रेस के लिए चुनौती इसलिए बन गया हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद दुर्ग जिले से आते हैं। वहीं गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के विधानसभा क्षेत्र में रिसाली नगर निगम, पीएचई मंत्री गुरु रूद्र कुमार के क्षेत्र में भिलाई-चरौदा नगर निगम और जामुल नगर पालिका परिषद है। ऐसे में दुर्ग जिले के इन चारों निकाय में जीत के लिए कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है।
कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न
आवास एवं परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर को चारों निकायों के लिए प्रभारी बनाया गया है। वहीं अन्य मंत्रियों को भी अप्रत्यक्ष जिम्मेदारियां दी गई है। दुर्ग जिले की चारों सीट कांग्रेस के लिए चुनौती इसलिए भी बना हुआ है क्योंकि दुर्ग संभाग से ही मंत्री रविंद्र चौबे, अनिला भेड़िया और अकबर भी आते हैं। भिलाई नगर निगम में तो कांग्रेस के महापौर और उसकी परिषद रही है। भिलाई विधायक देवेंद्र यादव यहां से महापौर रहे हैं। ऐसे में इस नगरीय निकाय पर कब्जा बरकरार रखना कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।
गुरु का दावा सरकार के विकास कार्यों पर लगेगी मुहर
दुर्ग जिले के चुनाव हॉटस्पॉट बनने और जीत-हार को लेकर पीएचई मंत्री गुरु रुद्र कुमार का कहना है कि कांग्रेस ना केवल दुर्ग की चारों बल्कि 15 के 15 निकायों में बहुमत के साथ आएगी और अपना महापौर-अध्यक्ष बनाएगी। बीते तीन सालों में कांग्रेस की सरकार ने जो विकास कार्य किए हैं, वह बीते 15 सालों के भाजपा राज में नहीं हो पाया था।
कांग्रेस ने क्षेत्रीय विधायकों को सौंपी कमान
निकाय चुनाव में कांग्रेस ने प्रभारी मंत्रियों और क्षेत्रीय विधायकों को जीताने की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं भाजपा ने भी अपने विधायकों को यहां पर प्रभारी बनाया है। भाजपा ने जिला संगठन के पदाधिकारियों को चुनाव जीताने सरकार के खामियों को आगे लाने की रणनीति तैयार की है। नाम वापसी के बाद दोनों दलों ने अपने पदाधिकारियों की बैठक के लेकर प्रचार की शुरूआत कर दी है।
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