नक्सलगढ़ कहे जाने वाले बस्तर की तस्वीर अब बदलती नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ में नक्सली हमेशा से ही स्वतंत्रता दिवस का बहिष्कार करते आए हैं। यहां तक की कई इलाकों में नक्सली इस दिन काला झंडा भी फहराते हैं। लेकिन अब सरेंडर किए हुए इन नक्सलियों ने पूरे मान-सम्मान के साथ तिरंगा फहराया। इतना ही नहीं आत्मसमर्पित नक्सलियों ने ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान भी किया।
दंतेवाड़ा के नक्सलगढ़ मासापारा में 7 साल बाद तिरंगा फहराया गया। सरेंडर नक्सलियों ने यहां भारत माता की जय के नारे भी लगाए। इससे एक दिन पहले आत्मसमर्पित नक्सलियों ने शिक्षकों के साथ मिलकर समारोह की तैयारी भी की थी।
शान से लहराया तिरंगा
स्वाधीनता दिवस को लेकर सरेंडर नक्सलियों में जबरदस्त उत्साह दिखा। शिक्षकों के साथ मिलकर सरेंडर नक्सलियों ने खुद पूरे स्कूल की साफ-सफाई की। ध्वज भी खुद ही लगाया। फिर खुद बच्चों को स्कूल भी लेकर पहुंचे। जहां सरेंडर नक्सलियों के साथ मिलकर इलाके के ग्रामीणों और बच्चों ने आजादी का पर्व मनाया। पूरे 7 साल के बाद इस इलाके में शान से तिरंगा फहराया।
एसपी ने बताया बदलता बस्तर
दंतेवाड़ा एसपी अभिषेक पल्लव ने इसे जिले की बदलती हुई तस्वीर बताया। उन्होंने बताया कि बस्तर अब बदल रहा है। इस मौके पर उन्होंने इलाके में सक्रिय नक्सलियों से मुख्यधारा से जुड़ने की भी अपील की।
जिन्होंने तोड़ा था उन्होंने ने ही बनाया भवन
साल 2014 में मासापारा के स्कूल को नक्सलियों ने ध्वस्त कर दिया था। जिन्होंने स्कूल भवन को ब्लास्ट कर उड़ाया था, उनमें से कई नक्सली इसी गांव के ही रहने वाले थे। स्कूल भवन क्षतिग्रस्त होने के बाद से इलाके के कई बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे थे। तो कई बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे गांव जाना पड़ रहा था। इसे देखते हुए साल 2020 में इलाके के 18 नक्सलियों ने दंतेवाड़ा कलेक्टर दीपक सोनी, एसपी अभिषेक पल्लव और CRPF के तत्कालीन DIG डीएन लाल के सामने सरेंडर कर दिया। जिसके बाद सरेंडर नक्सलियों ने मासापारा में स्कूल भवन बनाने की मांग की थी। कलेक्टर ने इसके लिए स्वीकृति भी दे दी। कुछ महीनों में ही सरेंडर नक्सलियों ने भवन को वापस खड़ा कर दिया।
कलेक्टर ने ली पहली क्लास
सरेंडर नक्सलियों ने साल 2020 में ही स्कूल भवन को बना दिया था। लेकिन कोरोना की वजह से क्लासेस नहीं लग रही थी। 2 अगस्त को पूरे 7 साल बाद स्कूल की घंटी बजी। स्कूल खुलने के पहले दिन ही सरेंडर नक्सली बच्चों की उंगली पकड़कर उन्हें स्कूल लेकर आए। यहां कलेक्टर ने बच्चों की पहली क्लास ली थी।
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