छत्तीसगढ़ के उदंती टाइगर की वापसी की संभावनाएं फिर से जाग उठी हैं क्योंकि लगभग दो दशक बाद धमतरी जिले के संदबाहरा जंगल में टाइगर के पगचिन्ह मिलने की पुष्टि हुई है। रविवार सुबह अरसीकन्हार रेंज अंतर्गत संदबाहरा क्षेत्र में पगचिन्ह देखे गए, जिसकी जानकारी मिलते ही एंटी पोचिंग टीम के एसडीओ गोपाल कश्यप और रेंजर प्रतिभा मेश्राम मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने तत्काल पीओपी से टाइगर के पगचिन्ह का मोल्ड तैयार किया और आगे की वैज्ञानिक जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
वन विभाग के अनुसार यह पगचिन्ह उदंती टाइगर की वापसी का प्रमाण हो सकता है। अफसरों का मानना है कि यह क्षेत्र फिर से बाघों की सक्रियता वाला क्षेत्र बन सकता है। पगचिन्ह मिलने के बाद आसपास के गांवों में मुनादी करवाकर लोगों को सतर्क किया गया है। इसके साथ ही वन विभाग ने गश्ती दल की संख्या भी बढ़ा दी है। अधिकारी इस खोज को सुखद संकेत मान रहे हैं, क्योंकि इससे टाइगर रिजर्व की सफलता और जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को बल मिलता है।
वहीं दूसरी ओर, ग्रामीणों में उदंती टाइगर की वापसी से दहशत का माहौल भी देखा जा रहा है। कई ग्रामीणों ने जंगल से आने-जाने में डर जताया है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि सावधानी बरती जाए और अनावश्यक रूप से जंगल की ओर न जाएं। अफसरों के अनुसार यदि पुष्टि होती है कि यह पगचिन्ह वाकई बाघ के हैं, तो यह उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
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