दिव्यांगजनों के लिए ज्ञान और प्रेरणा के नए द्वार खोलने की दिशा में रायपुर में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में ब्रेल पुस्तकों और ऑडियो बुक्स का विमोचन किया। यह सामग्री छत्तीसगढ़ की वीर और दिव्यांग महिलाओं की जीवन यात्रा और संघर्ष की कहानियों पर आधारित है, जिसे विशेष रूप से दृष्टिहीन और विशेष आवश्यकता वाले पाठकों के लिए तैयार किया गया है।

इस अवसर पर दो ब्रेल पुस्तकें और तीन हजार से अधिक कंटेंट को संकलित कर तैयार की गई ऑडियो बुक्स जारी की गईं। साथ ही, ऑडियो बुक्स निर्माण में योगदान देने वाले राज्य के विभिन्न जिलों के शिक्षकों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने इस समावेशी प्रयास को साकार करने में अहम भूमिका निभाई।

प्रेरणा देने वाली गुमनाम सफलताएं

राज्यपाल ने कहा कि समाज में अनेक ऐसी गुमनाम हस्तियां हैं, जिनके कार्य अत्यंत अनुकरणीय हैं, लेकिन वे अक्सर चर्चा से दूर रह जाती हैं। ब्रेल और ऑडियो बुक्स के माध्यम से इन कहानियों को सामने लाना आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिव्यांगता और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में लिया गया है। दिव्यांगजन समाज का अभिन्न अंग हैं और उनके बिना समावेशी विकास संभव नहीं है।

सुगम वातावरण के निर्माण पर जोर

राज्यपाल ने इस बात पर विशेष बल दिया कि दिव्यांगजनों के लिए सार्वजनिक स्थलों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी परिसरों में रैम्प, सुगम मार्ग और अनुकूल सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

उन्होंने ऑडियो बुक्स की सराहना करते हुए कहा कि इनका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, जिससे छत्तीसगढ़ के बाहर रहने वाले दिव्यांगजन भी इस ज्ञान सामग्री का लाभ उठा सकें।

शिक्षकों के योगदान को मिला सम्मान

कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित सुश्री के. शारदा, श्रीमती प्रीति शांडिल्य सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षकों की संवेदनशीलता और समर्पण के बिना इस प्रकार की समावेशी पहल संभव नहीं हो सकती।

यह आयोजन केवल पुस्तकों का विमोचन नहीं, बल्कि एक ऐसे समाज की ओर बढ़ता कदम है, जहां ज्ञान, अवसर और सम्मान हर व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे।